मकर संक्रांति: ‘सिर्फ धार्मिक मान्यता ही नहीं मकर संक्रांति के पीछे है वैज्ञानिक आधार’

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली। सनातन धर्म में पर्व और त्योहारों( Makar Sankranti 2019) का महत्व है। हर पर्व और त्योहार के पीछे आस्था से जुड़ी है। पश्चिमी जगत भारतीय रीति रिवाजों पर हमेशा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता रहा है। लेकिन अगर आप हिंदू धर्म से जुड़े त्योहारों को देखें तो कहीं न कहीं इनका मौसम, महीनों से गहरा ताल्लुक है। अब तो पश्चिम जगत के लोग भी इस तथ्य को स्वीकार करने लगे हैं कि भारतीय त्योहार सिर्फ आस्था के प्रतीक नहीं हैं बल्कि उनका वैज्ञानिक आधार भी है।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक आधार

तिल के लड्डू में बड़ी मात्रा में गुड फैट पाया जाता है जो हृदय, स्किन और बालों के लिए है फायदेमंद होता है।

एंटीऑक्सीडेंट्स सर्दियों में रोग से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। इसके साथ ही एनीमिया को दूर करने के लिए आयरन महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। 

तिल में तेल की प्रचुरता रहती है, इसके साथ ही गुड़ की तासीर भी गर्म मानी जाती है। तिल और गुड़ को मिलाकर जो खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं उनकी वजह से हमारी शरीर को जरूरत के हिसाब से गर्मी मिलती रहती है। 

ठंड के कारण पाचन शक्ति भी मंद हो जाती है। तिल में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन शक्ति को बढ़ाता है।

तिल में कई प्रकार के प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्‍प्‍लेक्‍स और कार्बोहाइट्रेड आदि तत्‍व पाये जाते हैं, जो इस मौसम में शरीर के लिए जरूरी होते हैं।

गुड़ मैग्नीशियम का एक बेहीतरीन स्रोत है। ठंड में शरीर को इस तत्व की बहुत आ‌श्यकता होती है।

धार्मिक मान्यताओं के आधार पर कहा जाता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए उनके घर जाते हैं। 

मकर संक्रांति के समय नदियों में वाष्पन क्रिया होती है। इससे तमाम तरह के रोग दूर हो सकते हैं। इसलिए इस दिन नदियों में स्नान करने का महत्व बहुत है।

मकर संक्रांति में उत्तर भारत में ठंड का समय रहता है। ऐसे में तिल-गुड़ का सेवन करने के बारे में विज्ञान भी कहता है। ऐसा करने पर शरीर को ऊर्जा मिलती है। जो सर्दी में शरीर की सुरक्षा के लिए मदद करता है।

इस दिन खिचड़ी का सेवन करने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण है। खिचड़ी पाचन को दुरुस्त रखती है। इसमें अदरक और मटर मिलाकर बनाने पर यह शरीर को रोग-प्रतिरोधक बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करती है।

मकर संकांति के दिन लोग सुबह सुबह स्नान करते हैं। इसके साथ तिल और गुड़ के लड्डू का सेवन करते हैं। ये एक वैज्ञानिक तथ्य भी है कि मकर संक्रांति या खिचड़ी के बाद से सूरज अपनी दिशा को बदलना शुरू कर देता है। दक्षिरायण से सूरज उत्तरायण होने लगता है। वातावरण में धीरे धीरे गर्मी का अंश बढ़ने लगता है। 

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