ई-कॉमर्स में 5 साल में हर वर्ष आई 45% बढ़त, दो साल में मोबाइल की 40 हजार दुकानें हुईं बंद

सरकार के ई-कॉमर्स क्षेत्र में एफडीआई के नए नियमों के कारण कारोबारियों को उम्मीद है कि अब एक्सक्लूसिव सेल आदि घटेगी जिससे उनके ऑफलाइन कारोबार को मदद मिलेगी।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : देश में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स बाजार के कारण ऑफलाइन रिटेल कारोबार घट रहा है। नतीजतन इस क्षेत्र में रोजगार भी कम हो रहे हैं। ऑफलाइन ट्रेडर्स का कारोबार तीन साल में 20 से 35 फीसदी तक घटा है। पांच साल में औसतन एक दुकान में जहां चार लोग कार्य करते थे वहां अब दो लोग ही काम कर रहे हैं। सरकार के ई-कॉमर्स क्षेत्र में एफडीआई के नए नियमों के कारण कारोबारियों को उम्मीद है कि अब एक्सक्लूसिव सेल आदि घटेगी जिससे उनके ऑफलाइन कारोबार को मदद मिलेगी।एसोचैम-रिसर्जेंट की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक देश में 2018 तक ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों की संख्या 12 करोड़ हाेने का अनुमान था। क्रिसिल रिसर्च के मुताबिक 2012-13 से 2017-18 के पांच वर्ष के दौरान ई-कॉमर्स इंडस्ट्री हर वर्ष औसतन 45 से 50 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है।कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया ने कहा कि ई-कॉमर्स के कारण कृषि क्षेत्र के जैसे ही अब रिटेल व्यापार में अर्द्ध बेरोजगारी आ गई है। खुदरा व्यापार क्षेत्र में तीन बदलाव अवश्य आए हैं। एक तो व्यापारियों की अगली पीढ़ी अब अपने व्यापार में आने के बजाय कॉरपोरेट की नौकरियों का रुख कर रही है। मार्जिन इतना कम हो गया है कि कारोबार करना ही कठिन हो गया है। दूसरा, बीते पांच सालों में दुकानों पर पहले जहां चार व्यक्ति औसतन कार्य कर रहे थे, वे अब घटकर दो हो गए हैं।करीब 50 फीसदी तक जॉब कम हुए हैं, नए रोजगार नहीं आ रहे हैं। तीसरा, किराना व्यापारी की दुकान पर मोबाइल, बैटरी, चार्जर, सिम, कुरिअर जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। यानी हर व्यापारी धंधे को बचाने के लिए कुछ ना कुछ अतिरिक्त कर रहा है। ई-कॉमर्स के कारण सर्वाधिक नुकसान इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल, कंप्यूटर, लैपटॉप), फुटवेयर, रेडीमेड गारमेंट्स क्षेत्र को हुआ है। अब किराना, मेडीसिन, होटल-रेस्त्रां, एज्युकेशन सेक्टर में आ रहा है। जोमैटो, ऊबर, स्विगी आदि से घर बैठे ही लोग खाना मंगा लेते हैं, अब होटल-रेस्टॉरेंट बिजनेस सर्वाधिक तेजी से प्रभावित हो रहा है। टूर एंड ट्रेवल्स बिजनेस तो पहले से ही इसकी गिरफ्त में है।क्लोथिंग मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसीडेंट राहुल मेहता कहते हैं कि विदेशी फंडिंग से ई-कॉमर्स कंपनियां भारी डिस्काउंट देती है। इससे ब्रांड विशेष पर भी विपरीत असर पड़ता है। रेडीमेड गारमेंट्स, अपैरल में तो स्टॉक निकालने के लिए भी डिस्काउंट दिया जाता है लेकिन ग्राहक समझ नहीं पाता और वो खरीददारी करता है। असर के बारे में उन्होंने कहा कि पहले देश में ऑफ लाइन रेडीमेड गारमेंट्स, अपैरल का कारोबार आठ से 10 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रहा था अब इसमें सिर्फ दो फीसदी की ग्रोथ रह गई है।विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए सरकार ने नियम सख्त किए हैं। एक फरवरी से लागू होने वाली ऑनलाइन रिटेल में एफडीआई की संशोधित नीति के मुताबिक ई-कॉमर्स कंपनियां सभी वेंडर्स को बिना भेदभाव एक जैसी सर्विस मुहैया करवाएं। वहीं दूसरी ओर ई-कॉमर्स कंपनियां किसी भी विक्रेता को उसके प्रोडक्ट सिर्फ अपने प्लेटफॉर्म पर बेचने के लिए नहीं कहेंगी। कई अन्य नियम भी सरकार ने बनाए हैं। इस संबंध में कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल कहते हैं कि नई पॉलिसी से यह फायदा होगा कि ई-कॉमर्स कंपनियां जो अपनी मनमानी कर रही थीं वो अब नहीं कर पाएंगी। जिस तरह से कंपनियां एक्सक्लूसिव ऑफर, लॉस फंडिंग, डीप डिस्काउंटिंग, लगातार बड़ी-बड़ी सेल लगा रहीं थी वो नहीं लगा पाएंगी। वो व्यक्ति जो ब्रांड को ऑनर है वो अपने ही ई-प्लेटफार्म पर वस्तुएं नहीं बेच पाएगा क्योंकि असली गड़बड़ी इसी में होती थी। कुल मिलाकर बाजार में बराबरी का, प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा। इसके लिए रेग्युलेटरी अथॉरिटी बने और ई-कॉमर्स की पॉलिसी तुरंत लागू हो।वहीं फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता ने सरकार की पॉलिसी के संबंध में कहा कि हम सरकार के साथ निष्पक्ष विकास की नीतियों पर चलते रहेंगे। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी बनेगी और उसका फायदा उपभोक्तओं, छोटे सप्लायर्स, आधारभूत ढ़ांचे के विकास और इनोवेशन को मिलेगा।पीडब्ल्यूसी के पार्टनर एंड लीडर डील स्ट्रेटजी संकल्प भट्‌टाचार्य ने कहा कि पिछले वर्ष फ्लिपकार्ट की ग्रोथ 50 फीसदी और अमेजन की ग्रोथ 80 फीसदी की थी। भविष्य में इनकी ग्रोथ 30 से 50 फीसदी प्रतिवर्ष की रह सकती है। हालांकि वेंडर्स के नियमों सहित एफडीआई नियमों में हुए बदलाव के असर को देखना होगा। क्रिसिल रिसर्च के मुताबिक वित्त वर्ष 2020-21 तक ई-कॉमर्स बिजनेस 2.5 लाख करोड़ से 2.7 लाख करोड़ रुपए रहने की की उम्मीद है। 2020-21 तक ई-कॉमर्स के 33 से 38 फीसदी वार्षिक की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है।

 

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