क्या बेलगाम विकास मानवता के लिए बन रहा है खतरा?

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली।आने वाले दो दशकों में दुनियाभर में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलेगा। इसके भी दो पहलू होंगे। चाहे बायोसाइंसेज हो या हथियारों का क्षेत्र, सबमें क्रांतिकारी बदलाव आएंगे। ऐसे में हमारा भविष्य समृद्धशाली होगा या विध्वंसक, यह हमारे द्वारा प्रौद्योगिकी में होने वाले बदलाव के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा। साथ ही, प्रौद्योगिकी विकास की अंधी दौड़ के लिए एक लक्ष्मणरेखा भी तय करनी होगी।

एक समय था, जब चीन के एक वैज्ञानिक ही जियानकुई द्वारा एक नवजात शिशु के शरीर से एचआईवी होने वाले जीन को बाहर निकालने का दावा करने के बाद दुनियाभर में इसपर भारी हायतौबा मची थी और इसे ईश्वर की कृति से खिलवाड़ बताकर उसकी निंदा की गई थी। इस घटना के कुछ साल बाद जब कैब बुक करने के लिए मोबाइल ऐप आया, तो दक्षिण कोरिया में हजारों की तादाद में कैब ड्राइवर सड़क पर उतर आए और उसका विरोध किया। उनका कहना था कि इससे उनकी रोजी-रोटी छीन जाएगी। दोनों ही क्षणभंगुर मामले थे, जिसने अनिच्छुक दुनिया के संभावित जोखिमों का चित्रण किया।

लेकिन, पिछले दो दशक के दौरान ऐप इकॉनमी और इंटरनेट की बढ़ती रफ्तार की तुलना में आने वाले दो दशक में भारी प्रौद्योगिकी तब्दीलियां नजर आएंगी। यह काम करने के तरीके, लड़ाई के तरीके, रहन-सहन के तरीके और यहां तक कि बातचीत के तरीके तक को बदलकर रख देगा।

हम जितना अधिक विकास की तरफ बढ़ रहे हैं, हमारे लिए खतरा उतना ही बढ़ता जा रहा है। यह प्रोद्योगिकी बदलाव ऐसे वक्त में सामने आ रहा है, जब वैश्विक व्यापार, वित्त और राजनीतिक स्थिरता को सहारा देने वाले समस्त अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक तंत्र की शक्तियां क्षीण होती जा रही हैं।

वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (विश्व व्यापार संगठन) की बात करें, तो इसका सबसे बड़ा औजार यानी डेस्प्यूट सेटलमेंट मैकेनिज्म संकटों से घिरा है। दुनियाभर में लोगों के बीच आम राय है कि डब्ल्यूटीओ में सुधार किया जाना चाहिए, क्योंकि संरक्षणवाद में बढ़ोतरी हो रही है। जब नियंत्रण के औजारों में जंग लग रहा हो, तो ऐसे में दुनिया एआई ऐंड रोबोटिक्स, ऑटोनोमस वीकल्स और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए मानक और नैतिक मानदंडों को कैसे स्वीकार करेगी?

इसी तरह, बायोसाइंसेज, सिंथेटिक बायोलॉजी और बायो-इंजिनियर्ड थिंग्स में सफलताओं से उभरने वाली चिंताओं पर फैसला कैसे हो पाएगा? 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा मुद्दा कच्चा माल है, जो डेटा है। किसके पास डेटा रहेगा? निजता के अधिकार क्या हैं? अमेरिका और चीन की मुट्ठीभर कंपनियां दुनियाभर में राज करती हैं। क्या बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर नियंत्रण होना चाहिए, जैसा यूरोपीय संघ ने मांग की है।

कुछ लोगों की चिंता है कि आने वाले समय में रोबोट मानवों की जगह ले लेंगे। ये आशंकाएं शायद निर्मूल हैं। आने वाले समय में ड्राइवरलेस गाड़ियां भी आने वाली हैं। तो उन ड्राइवरों का क्या होगा, जो बस, ट्रक कारें और अन्य वाहन चला रहे हैं। कुछ लोग इसे हाइब्रिड फ्यूचर करार दे रहे हैं। लेकिन इस तरह के प्रौद्योगिकी बदलाव की सभी देशों को जरूरत है। रोबोट आएंगे, तो रोबोट का संचालन करने वालों की नौकरियां भी पैदा होंगी।

तब, सवाल यह उठता है कि उभरती प्रौद्योगिकी किस तरह राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभावित करेगी और भविष्य में होने वाले युद्ध का तरीका कैसा होगा।

पूरी तरह से विकसित भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौर में आर्म्स कंट्रोल फ्रेमवर्क की असफलता की शुरुआत पहले ही हो चुकी है। अमेरिका ने इंटरमीडियट न्यूक्लियर फोर्सेज (आईएनएफ) से बाहर निकलने की धमकी दी है। यह समझौता अमेरिका और रूस के बीच है। अगर अमेरिका ने ऐसा किया, तो हथियारों की एक नई अंधी दौड़ शुरू हो जाएगी।

इससे, अमेरिका, रूस, चीन तथा भारत के बीच परमाणु हथियारों की नई दौड़ शुरू हो जाएगी। चारों देश पहले से ही हाइपरसोनिक मिसाइलों का विकास कर रहे हैं, जो ध्वनि की गति से पांच गुना अधिक तेजी से मार करने में सक्षम होंगे। क्या इस तरह के हथियारों पर प्रतिबंध नहीं लगनी चाहिए? इसी तरह, जेनेवा में यूएन एक्सपर्ट ग्रुप ऑटोनोमस वेपंस-एयर, सी और लैंड के सवाल की पड़ताल कर रहा है। हम उन्हें कैसे नियंत्रित करते हैं? क्या उन्हें प्रतिबंधित किया जाना चाहिए?

आने वाले समय में ये बड़ी चुनौतियां होंगी। आपकी भविष्य में दिलचस्पी नहीं हो सकती है, लेकिन भविष्य आपमें इंट्रेस्टेड है। मानव जाति के समक्ष आने वाले समय में कई तरह की चुनौतिया होंगी, जिनमें से एक जलवायु परिवर्तन भी होगा। लेकिन हमारा आने वाला भविष्य समृद्धशाली होगा या विध्वंसक, यह प्रौद्योगिकी क्रांति के हमारे इस्तेमाल करने के तरीके पर निर्भर करेगा।

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