हाईकोर्ट के जज ने कहा- “बंटवारे के बाद भारत होना चाहिए था हिंदू राष्‍ट्र”

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली।मेघालय हाईकोर्ट के जज एसआर सेन ने एक सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी की, जिससे विवाद हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश के विभागज ने समय पाकिस्तान ने तो खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया, लेकिन भारत सेक्युलर बनकर रहा गया। भारत को भी हिंदू राष्‍ट्र घोषित किया जाना था। सेन ने यह टिप्पणी पीआरसी (स्थायी निवासी प्रमाणपत्र) को लेकर एक मामले की सुनवाई के दौरान है। 

जस्टिस एसआर सेन ने कहा कि मैं साफ कर देना चाहता हूं कि किसी को भी भारत को दूसरा इस्लामिक देश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो भारत और दुनिया के लिए यह सबसे खराब दिन होगा। मुझे विश्वास है कि पीएम मोदी की सरकार इस चीज को समझेगी। उन्होंने यह आदेश अमोन राणा की याचिका पर दिया। बता दें कि अमोन राणा को मूल निवासी प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया गया था।

सेन ने कहा कि पाकिस्तान ने अपने आपको इस्लामिक देश घोषित किया था और तब भारत जो धर्म के आधार पर विभाजित हुआ था उसको भी हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था, लेकिन वह सेक्युलर देश रह गया। उन्होंने कहा कि इस अदालत को उम्मीद है कि भारत सरकार हिंदू, सिख, जैन, बुद्ध पारसी और ईसाई जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हैं उनको लेकर सचेत निर्णय लेगी। अपने आदेश में उन्होंने कहा कि हिंदू, सिख, जैन, बुद्ध, ईसाई, पारसी धर्म के लोगों का पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान के लोगों का आज भी उत्पीड़न होता है और इनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं होती है। उन्होंने यह भी कहा कि वह हिंदू जो विभाजन के दौरान भारत में दाखिल हुए उनको भी विदेशी समझा जाता है, जो मेरी नजर में अवैध है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

जस्टिस एसआर सेन ने कहा कि भारत ने बहुत मुश्किलों से आजादी हासिल की है। इसका दर्द सबसे ज्यादा हिंदू और सिख धर्म के लोगों को झेलना पड़ा। उन्हें अपने पूर्वजों की संपत्ति, जन्मस्थान को छोड़ना पड़ा।, हम इसको नहीं भूल सकते। हालांकि मैं यहां इसका जिक्र करने में गलती नहीं कर सकता कि जब सिख आए, तो उनको पुनर्वास मिला, लेकिन ऐसा हिंदुओं के साथ नहीं हुआ। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी, कानून मंत्री और संसद से मांग की है वह एक ऐसा कानून लाए जिससे पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बुद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को बिना किसी पूछताछ और कागजात के भारत की नागरिकता मिले।

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