कमजोर रुपया और वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच बीएसई का सेंसेक्स 550 अंक टूटकर बंद

BSE इंडेक्स 572.28 अंक नीचे गिरकर 35,312.13 पर जबकि NSE फिफ्टी 181.75 अंक गिरकर 10,601.15 पर बंद हुआ।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): विधानसभा चुनावों के नतीजों से जुड़ी अनिश्चितताओं और रुपये में कमजोरी की वजह से शेयर बाजारों में खलबली मची हुई है। RBI के पॉलिसी ऐक्शन का भी शेयर बाजारों पर कोई सकारात्मक असर नहीं दिख रहा है। गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बाजारों में भारी गिरावट देखी गई। कमजोर रुपया और वैश्विक अर्थव्यवस्था के संकेतों के बीच बीएसई का सेंसेक्स 550 से ज्यादा अंक टूटकर बंद हुआ। गुरुवार को 30 शेयरों वाला BSE इंडेक्स 572.28 अंक नीचे गिरकर 35,312.13 पर जबकि NSE फिफ्टी 181.75 अंक गिरकर 10,601.15 पर बंद हुआ। गौर करने वाली बात यह है कि NSE 50 में गुरुवार को 1.69 फीसदी जबकि सेंसेक्स में 1.59 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर बाजार के रुख को प्रभावित करने वाले कुछ बड़े कारण कौन से हैं।वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण एशियाई बाजारों में जबर्दस्त गिरावट देखी जा रही है। हॉन्ग कॉन्ग के हेंग सेंग, जापान के निक्केई और चीन के शंघाई बाजारों में गुरुवार को करीब 2.75 फीसदी की गिरावट देखी गई। उधर, हुवावे की मुख्य वित्त अधिकारी मेंग वानझोउ को कनाडा में गिरफ्तार किए जाने और अमेरिका प्रत्यर्पण की खबरों के बीच टेक्नॉलजी के शेयरों के गिरने से चीन और हॉन्ग कॉन्ग के बाजारों पर काफी असर पड़ा। रिजर्व बैंक ने कहा है कि वह MCLR की जगह रीटेल लोन्स को एक्सटर्नल बेंचमार्क्स से लिंक करेगा। इसके बाद बैंकिंग स्टॉक्स पर दबाव बढ़ गया। उधर, OPEC की अहम बैठक से पहले मेटल और ऑइल के शेयर नीचे आ गए। गुरुवार को मार्केट का मूड सुबह से ही डाउन था। आलम यह था कि सुबह 10.30 बजे ही ICICI बैंक, यस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक और HDFC बैंक के शेयर करीब 2 फीसदी नीचे आ गए। रुपये में कुछ तेजी देखी जा रही थी लेकिन यह एक बार फिर 54 पैसे कमजोर हो गया और गुरुवार को शुरुआती कारोबार में ही 1 डॉलर में 71 रुपये के आंकड़े को छू गया। वहीं, रेटिंग एजेंसी फिच ने गुरुवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 7.8 प्रतिशत से घटाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया। इसका भी बाजार के मूड पर असर हुआ। एजेंसी ने यह भी कहा है कि 2019 के आखिर में रुपया कमजोर होकर 75 प्रति डॉलर पर आ सकता है। आपको बता दें कि ज्यादा लागत और ऋण उपलब्धता में कमी के चलते फिच ने अनुमान घटाया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के द्वारा लगातार बिकवाली के चलते भी मार्केट के मूड पर असर पड़ा है। नेट बेसिस पर देखें, तो बुधवार को FPIs ने 357.82 करोड़ रुपये की कीमत के शेयर बेचे जबकि DIIs की तरफ से 791.59 करोड़ की बिकवाली की गई।

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