6 दिसम्बर: आज ही गिरा था वो ढांचा जिसे कुछ ने नाम दे रखा था “बाबरी”, दिवंगत सभी श्रीराम भक्तों को भावभीनी श्रद्धांजलि!!

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली।इस दिन ने इतिहास को पलट कर और बदल कर रख दिया था.. इस से पहले न जाने कितने शासकों ने इसके लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, भगवान श्रीराम से प्रेम करने वाली आम जनता की तो गिनती भी नहीं की जा सकती है .. प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर जो ढांचा खड़ा था उसको कुछ बाबर प्रेमी बाबरी का नाम दे रखे थे .. यहां तक कि वो बाबर प्रेमी आज तक उसके लिए संघर्ष करते देखे जा सकते हैं जबकि प्रभु श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम थे और अगर तलाशा जाय तो उनमें से कई के पूर्वज श्रीराम भक्त ही थे जिन्होंने बाद में कुछ कारणों से अपने सोच, विचार , जीवन , पूजा पद्धति आदि को बदल डाला और बन बैठे सबको जोड़ कर साथ चले, अन्याय अधर्म से जीवन पर्यंत लड़े भगवान श्रीराम के दुश्मन। 

श्रीराम मन्दिर को बाबर के आदेश से उसके सेनापति मीर बाकी ने 1528 ई. में गिराकर वहाँ एक मस्जिद बना दी। इसके बाद से हिन्दू समाज एक दिन भी चुप नहीं बैठा। वह लगातार इस स्थान को पाने के लिए संघर्ष करता रहा। 23 दिसम्बर, 1949 को हिन्दुओं ने वहाँ रामलला की मूर्ति स्थापित कर पूजन एवं अखण्ड कीर्तन शुरू कर दिया। ‘विश्व हिन्दू परिषद्’ द्वारा इस विषय को अपने हाथ में लेने से पूर्व तक 76 हमले हिन्दुओं ने किये; जिसमें देश के हर भाग से तीन लाख से अधिक नर नारियों का बलिदान हुआ; पर पूर्ण सफलता उन्हें कभी नहीं मिल पायी।

विश्व हिन्दू परिषद ने लोकतान्त्रिक रीति से जनजागृति के लिए श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का गठन कर 1984 में श्री रामजानकी रथयात्रा निकाली, जो सीतामढ़ी से प्रारम्भ होकर अयोध्या पहुँची। इसके बाद हिन्दू नेताओं ने शासन से कहा कि श्री रामजन्मभूमि मन्दिर पर लगे अवैध ताले को खोला जाए। न्यायालय के आदेश से 1 फरवरी, 1986 को ताला खुल गया। इसके बाद वहाँ भव्य मन्दिर बनाने के लिए 1989 में देश भर से श्रीराम शिलाओं को पूजित कर अयोध्या लाया गया और बड़ी धूमधाम से 9 नवम्बर, 1989 को श्रीराम मन्दिर का शिलान्यास कर दिया गया। जनता के दबाव के आगे प्रदेश और केन्द्र शासन को झुकना पड़ा।

पर मन्दिर निर्माण तब तक सम्भव नहीं था, जब तक वहाँ खड़ा ढांँचा न हटे। हिन्दू नेताओं ने कहा कि यदि मुसलमानों को इस ढाँचे से मोह है, तो वैज्ञानिक विधि से इसे स्थानान्तरित कर दिया जाए; पर शासन मुस्लिम वोटों के लालच से बँधा था। वह हर बार न्यायालय की दुहाई देता रहा। विहिप का तर्क था कि आस्था के विषय का निर्णय न्यायालय नहीं कर सकता। शासन की हठधर्मी देखकर हिन्दू समाज ने आन्दोलन और तीव्र कर दिया।

इसके अन्तर्गत 1990 में वहाँ कारसेवा का निर्णय किया गया। तब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह की सरकार थी। उन्होेंने घोषणा कर दी कि बाबरी परिसर में एक परिन्दा तक पर नहीं मार सकता; पर हिन्दू युवकों ने शौर्य दिखाते हुए 29 अक्तूबर को गुम्बदों पर भगवा फहरा दिया। बौखला कर दो नवम्बर को मुलायम सिंह ने गोली चलवा दी, जिसमें कोलकाता के दो सगे भाई राम और शरद कोठारी सहित सैकड़ों कारसेवकों का बलिदान हुआ।

इसके बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। एक बार फिर 6 दिसम्बर, 1992 को कारसेवा की तिथि निश्चित की गयी। विहिप की योजना तो केन्द्र शासन पर दबाव बनाने की ही थी; पर युवक आक्रोशित हो उठे। उन्होंने वहाँ लगी तार बाड़ के खम्भों से प्रहार कर बाबरी ढाँचे के तीनों गुम्बद गिरा दिये। इसके बाद विधिवत वहाँ श्री रामलला को भी विराजित कर दिया गया।

हैरानी की बात ये रही कि ये उस बाबर के लिये श्रद्धा जताते रहे जो निर्विवाद रूप से भारत को लूटने और यहां कत्लेआम करने के लिए आया था ..कुछ के जीवन और परम्परा में आया आमूलचूल परिवर्तन भी बाबर के आक्रमण की ही देन है .. कुछ लड़ कर स्वयं को बलिदान कर गए और कुछ ने तलवारों के आगे डर कर ..सब कुछ बदल डाला .. यद्द्पि आज उन्ही के मन से डर खत्म हो सा गया है और अपने ही पूर्वजों के आराध्य के खिलाफ ऐसे खड़े हो गए हैं जैसे बाबर ने भारत मे आ कर उनके पूर्वजो पर कोई एहसान जैसा कर दिया रहा हो ..इस जंग में दिवंगत श्रीराम भक्तों की संख्या का सही सही आकलन भी नही है किसी के पास क्योंकि स्वघोषित नकली कलमकार और तथाकथित इतिहासकार सिर्फ बाबर के गुणगान से अपने कलम की स्याही व अपने पेट मे अन्न भर रहे थे ..भले ही उनके जमीर ने बार बार उन्हें चेतावनी दी रही हो ..

आज उन सभी ज्ञात अज्ञात वीरों को , बलिदानियों को बारम्बार श्रद्धांजलि जिन्होंने धर्म, श्रीराम के नाम पर अपने जीवन को सदा सदा के लिए बलिदान कर दिया और श्रीराम के चरणों मे अनन्त काल के लिए स्थान पाए! NLN परिवार उन सभी श्रीराम भक्तों की गौरवगाथा को सदा सदा के लिए अमर रखने का संकल्प लेता है.. जय श्री राम!

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Facebook Auto Publish Powered By : XYZScripts.com