सरकार ने वेतन बढ़ाने की सेना की मांग ठुकराई

सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि सेना ने मांग की थी कि मासिक मिलिट्री सर्विस पे को 5500 रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया जाए

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : वित्त मंत्रालय ने सेनाओं की लंबे समय से चली आ रही मिलिट्री सर्विस पे (एमएसपी) बढ़ाने की मांग को खारिज कर दिया है। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस बात से सेना में काफी नाराजगी है। सैन्य मुख्यालय ने सरकार से तुरंत अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है। इस फैसले का असर 1.12 लाख सैन्य कर्मियों पर पड़ेगा। इनमें 87,646 जूनियर कमीशंड अफसर (जेसीओ) और समान रैंक वाले नौसेना और वायुसेना के 25434 अफसर भी शामिल हैं।सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया कि सेना ने मांग की थी कि मासिक मिलिट्री सर्विस पे को 5500 रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया जाए। जेसीओ और समान रैंक वाले नेवी और वायुसेना के अफसरों की एमएसपी बढ़ाए जाने का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय ने खारिज कर दिया। अगर सरकार ये प्रस्ताव मान लेती तो उसे सालाना 610 करोड़ रुपए का खर्च उठाना होता। सैन्यकर्मियों की विशिष्ट सेवा परिस्थितियों और परिश्रम को सम्मान देने के लिए एमएसपी दी जाती है। इसे छठवें वेतन आयोग में लागू किया गया।अभी एमएसपी की दो श्रेणियां हैं। एक अफसरों के लिए और दूसरी जवानों और जेसीओ के लिए। सातवें वेतन आयोग ने जेसीओ और जवानों के लिए 5200 और लेफ्टिनेंट से ब्रिगेडियर रैंक के बीच 15500 एमएसपी तय की थी। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, एक आर्मी अफसर ने नाम ना जाहिर होने की शर्त पर बताया- सेना लगातार दबाव बना रही है कि जेसीओ को दी जाने वाली एमएसपी बढ़ाई जाए, क्योंकि वे ग्रुप बी के राजपत्रित अधिकारी हैं और वे कमान और नियंत्रण स्तर पर सेना के ढांचे में अहम किरदार निभाते हैं। ऐसे में उन्हें जवानों के बराबर एमएसपी दिया जाना सही नहीं है। ये अन्याय है। सूत्र के मुताबिक, सेना ने पूरी ताकत से यह बात रक्षा मंत्रालय के सामने रखी। तीनों सेनाओं के साथ रक्षा मंत्रालय भी इस मांग के पक्ष में था। पिछले साल नंवबर में आर्मी चीफ ने कहा था कि जेसीओ राजपत्रित अधिकारी हैं और उन्होंने 7 साल पुराने उस नोट को निरस्त कर दिया, जिसमें जेसीओ को गैर-राजपत्रित अधिकारी कहा गया था।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Facebook Auto Publish Powered By : XYZScripts.com