16 लाख की आबादी वाला ये शहर, जहां महामारी बन गई है AIDS

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली।इंसान और मेडिकल साइंस ने भले ही कितनी भी तरक्‍की कर ली हो, HIV वायरस अभी भी एक चुनौती है। AIDS एक ऐसी बीमारी है, जागरुकता ही जिसका निदान भी है और बचाव भी। लेकिन तब क्‍या हो, जब मजबूरी में सब जानते-बूझते हुए भी इंसान इसकी दलदल में घुसने को मजबूर हो। मैक्‍स‍िको के तिजुआना की कहानी ऐसी ही है। करीब 16 लाख की आबादी वाले इस शहर में 125 लोगों में से हर दूसरे शख्‍स को एड्स है। ऐसा नहीं है कि वह इससे अनजान हैं, लेकिन पेट भरने और नशे की लत के आगे सभी बेबस हैं।

ड्रग एडिक्‍शन और एचआईवी संक्रमण

तिजुआना में एड्स फैलने का सबसे बड़ा कारण ड्रग एडिक्‍शन है। यहां बड़ी संख्‍या में लोग नशे की लत के श‍िकार हैं। ऐसे में एक ही सिरिंज का इस्‍तेमाल एचआईवी संक्रमण का बड़ा कारण बन गया है। तिजुआना के एचआईवी पीड़ितों में उन लोगों की संख्या अध‍िक है, जिन्हें अमेरिका से मैक्‍स‍िको डिपोर्ट कर दिया गया है। इनमें वो लोग हैं, जिनके पास अमेरिका में रहने के लिए जरूरी कागजात नहीं थे या फिर वो जो किसी तरह के अपराध में शामिल थे।

सेक्‍स वर्कर्स बनने की मजबूरी

तिजुआना में रहने वाले अध‍िकतर लोगों की माली हालत बेहद खराब है। रहने के लिए घर नहीं है। ड्रग्‍स की लत उन्‍हें मौत के करीब ले जा रही है और ऐसी मजबूरी में सेक्स वर्कर्स की संख्‍या बढ़ रही है। इनमें गे-सेक्‍स भी शामिल है। बड़ी संख्‍या में लोग ड्रग्‍स की चाहत लिए तिजुआना पहुंचते हैं और सेक्‍स वर्कर्स की भी इस कारण चांदी रहती है। ऐसे में सिरिंज और यौन दोनों तरह के संक्रमण के कारण एड्स इलाके में तेजी से फैला।

दो साल की मेहनत और हालात

फोटोग्राफर मैकोम लिंटन और पत्रकार जॉन कोहेन ने इस इलाके में दो साल से अध‍िक का समय बिताया। तस्‍वीरें कैद कीं और तिजुआना की कहानी दुनिया के सामने रखी। उनकी तस्‍वीरें एचआईवी संक्रमित मरीजों की भयावह हालत को दिखाती हैं। ये फोटोज Tomorrow Is a Long Time नाम की किताब में प्रकाश‍ित की गईं। मैक्सिको का यह शहर इंडस्ट्रियल और फाइनेंशियल सेंटर के रूप में भी जाना जाता है।

पूरे मैक्‍स‍िको के मुकाबले तीन गुना ज्‍यादा रोगी

पूरे मैक्सिको के एचआईवी पीड़ितों की औसत संख्या के मुकाबले तिजुआना में एचआईवी पीड़ितों की संख्या तीन गुनी है। कुछ रिपोर्ट्स यह भी बताते हैं कि तिजुआना में एचआईवी पीड़ितों में से सिर्फ 11 प्रतिशत लोग ही इसके इलाज का खर्च उठा पाते हैं। यानी नशे की लत के आगे बेबस तिजुआना जान-बूझकर एचआईवी से मौत को गले लगा रहा है। एचआईवी संक्रमण के इन आंकड़ों में फिलहाल उन बच्‍चों को शामिल नहीं किया गया है, जिन्‍हें मां-बाप से एड्स विरासत में मिली है।

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