अमृतसर ब्लास्ट : पुलिस ने की संदिग्धों की तस्वीर जारी, लश्कर-ए-तैयबा रच रहा है सारी साजिश?

पंजाब में धार्मिक फूट डालने की साजिश है 'अमृतसर ब्लास्ट

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली। पंजाब के अमृतसर शहर के गांव अदावली में स्थित निरंकारी भवन पर ग्रेनेड हमले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस ब्लास्ट में 3 लोगों की मौत हो गई। इस घटना के बाद पंजाब सहित राजधानी दिल्ली, हरियाणा और एन.सी.आर. में हाई अलर्ट कर दिया गया है। वहीं पंजाब पुलिस ने संदिग्धों की तस्वीर जारी कर उनकी तलाश शुरू कर दी है।

खुफिया एजैंसियों निरंकारी भवन पर हुए ग्रेनेड हमले का शक गोपाल सिंह चावला पर जताया है, जिसे आतंकी हाफिज सईद के साथ देखा गया था। अप्रैल में जब भारतीयों का एक जत्था बैसाखी पर श्री पंजा साहिब गुरुद्वारा के दर्शन करने गया था तो गोपाल सिंह चावला ने कई तरह की अड़चनें पैदा की थीं । गुरुद्वारा के बाहर रैफरैंडम-2020 के पोस्टर भी चिपकाए थे। इसके बाद से ही पंजाब में गड़बड़ी फैलाने की साजिशें रची जा रही थीं। 

पंजाब पुलिस व खुफिया एजैंसियों का मानना है कि यह खालिस्तानी व कश्मीरी आतंकी संगठनों की मिलीभगत से जन्मे नए टैरेरिस्ट ग्रुप का काम हो सकता है। खुफिया एजैंसियों ने पंजाब सरकार को अलर्ट भेजा है कि पंजाब में माहौल खराब करने के लिए पाकिस्तान बैठकर लश्कर-ए-तोयबा सारी साजिश रच रहा है। लश्कर कमांडर हाफिज सईद कश्मीरी व खालिस्तानी आतंकियों को टार्गेट देकर उनको फंडिंग भी मुहैया करवा रहा है।

खास तौर पर पंजाब में गड़बड़ी के लिए जैश-ए-मोहम्मद व जमात-उल-दावा नामक आतंकी संगठन को खालिस्तानी संगठनों को पुनर्जीवित करने व छोटे-छोटे हमले कर पंजाब का माहौल खराब करने का जिम्मा सौंपा गया है। इतना ही नहीं सूत्रों की मानें तो आतंकी जाकिर मूसा के भी पिछले दिनों में कुछ खालिस्तानी समर्थकों से मिलने की खबर है। जाकिर मूसा को कुछ ही दिन पहले पंजाब में देखा गया था। इस बात की शंका जताई जा रही है कि जिन लोगों से जाकिर मूसा मिला है, वह स्लीपर सेल भी हो सकते हैं।

अमृतसर में रविवार को निरंकारी भवन पर किए गए हमले के हमलावरों की पहचान तो अभी नहीं हो सकी है। पर यह हमला पंजाब में धर्म के नाम पर फूट डालने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा लग रहा है। दरअसल सिख कट्टरपंथियों और निरंकारियों के बीच आपसी तकरार काफी पुरानी है।

 हमलावर इस बात को जानते हैं । वह दोनों पक्षों में से किसी एक को उकसा कर पंजाब का माहौल खराब करना चाहते हैं। लिहाजा एक साजिश के अंतर्गत निरंकारी भवन पर हमला करने की योजना बनाई गई। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई.एस.आई. ने पंजाब में सक्रिय सिख कट्टरपंथियों के साथ जुड़े लोगों का इस्तेमाल करके इस धमाके को अंजाम दिया है।

क्यों निशाने पर हैं निरंकारी

पंजाब में 1980 के दशक में अशांति फिलाने वाले कट्टरपंथियों की निरंकारियों के साथ पुरानी दुश्मनी है। 1978 में बैसाखी वाले दिन दोनों पक्षों में खूनी टकराव भी हो चुका है। इस दौरान करीब 15 लोगों की मौत भी हो गई थी। दरअसल उस समय पंजाब सरकार ने निरंकारिओं को अमृतसर में धार्मिक समारोह करने की इजाजत दी थी। इसका विरोध करने आए दमदमी टकसाल और अन्य सिख संगठनों का निरंकारियों के साथ टकराव हो गया था। इस दौरान चली गोली में 13 लोगों की मौत हो गई थी।

निरंकारियों की इस कार्रवाई के जवाब में सिख कट्टरपंथियों ने निरंकारियों के प्रमुख गुरबचन सिंह को दिल्ली में गोलियों मारी थी। गुरबचन सिंह के कत्ल के आरोप में रणजीत सिंह को 13 साल जेल में भी बिताने पड़े। तब एस.जी.पी.सी. ने जेल सजा काट रहे रणजीत सिंह को श्री अकाल तख्त साहब का जत्थेदार बनाने का ऐलान कर दिया था। हालांकि बाद में रणजीत सिंह को रिहा कर दिया गया ,जिसके बाद उन्होंने अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार का अपना पद संभाला।

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