IAF अफसरों ने राफेल जैसे 4 प्लस या 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को बेड़े में शामिल किए जाने की जरूरत

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : राफेल सौदे की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर बुधवार कोसुप्रीम कोर्ट ने मैराथन सुनवाई की। खास बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भारतीय वायुसेना के अफसरों ने भी अपना पक्ष रखा। IAF अफसरों ने कोर्ट में जोर देकर कहा कि राफेल जैसे 4 प्लस या 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को बेड़े में शामिल किए जाने की जरूरत है। अफसरों ने बताया कि इस तरह के प्लेन्स बेहतरीन स्टील्थ टेक्नॉलजी के अलावा उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताओं से भी लैस होते हैं। आपको बता दें कि स्टील्थ टेक्नॉलजी के प्लेन आधुनिक रेडार को भी चकमा देने में सक्षम होते हैं।दरअसल, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि राफेल डील को लेकर विवाद चूंकि भारतीय वायुसेना से संबंधित है, ऐसे में वह IAF के अफसरों का भी पक्ष जानना चाहते हैं। संक्षिप्त नोटिस पर IAF के टॉप अफसर- एयर वाइस मार्शल जे. चलपति, एयर मार्शल अनिल खोसला और डेप्युटी चीफ ऑफ एयर स्टाफ, एयर मार्शल वीआर चौधरी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।वायुसेना के अफसरों ने बेंच को बताया कि सुखोई 30 सेना में शामिल किया गया सबसे नवीनतम प्लेन है, जो 3.5 पीढ़ी का एयरक्राफ्ट है। अफसरों ने आगे कहा कि IAF के पास चौथी या पांचवीं पीढ़ी का प्लेन नहीं है। आपको बता दें कि जब अटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र की ओर से अपने तर्क रखे तब बेंच को अफसरों का पक्ष जानने की जरूरत महसूस हुई।अटर्नी जनरल फ्रांस से हुई 36 राफेल फाइटर जेट की डील की सीबीआई जांच के लिए दायर की गई याचिकाओं का विरोध कर रहे थे। लंच से पहले के सेशन में बेंच ने कहा, ‘हम एयरफोर्स की जरूरतों को लेकर बात कर रहे हैं और ऐसे में किसी एयरफोर्स के अफसर से बात करना चाहेंगे। हम इस मसले पर रक्षा मंत्रालय के अधिकारी से नहीं बल्कि एयरफोर्स के अफसर से सुनना चाहते हैं।’चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच में जस्टिस संजय किशन कौल और केएम जोसेफ शामिल थे। चलपति ने भारत द्वारा लड़ाकू विमानों को शामिल किए जाने को लेकर CJI द्वारा पूछे गए सभी सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि देश को पांचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट की जरूरत है, जिसमें शानदार स्टील्थ टेक्नॉलजी (चकमा देने की तकनीक) और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमता होती है।CJI ने चलपति से पहला सवाल पूछा, ‘IAF में शामिल नवीनतम प्लेन कौन सा है?’ चलपति ने जवाब दिया कि सुखोई Su-30MKI है, जिसे HAL ने महाराष्ट्र के नासिक और कर्नाटक के बेंगलुरु में बनाया है। उन्होंने कहा कि IAF को हर साल नए Su-30MKI प्लेन मिल रहे हैं। CJI ने तब पूछा कि सुखोई के अलावा कौन सा प्लेन भारत में बनाया जा रहा है। अधिकारी ने कहा कि वह खुद एक पायलट हैं और बेंगलुरु में बनाए गए हल्के लड़ाकू विमान पसंद हैं लेकिन इसे अभी IAF में शामिल किया जाना बाकी है। सीजेआई गोगोई ने चलपति से वायुसेना में 1985 में ‘मिराज’ विमान के बाद शामिल विमानों के बारे में पूछा। जब अधिकारी ने ‘ना’ में जवाब दिया तो सीजेआई ने कहा, ‘इसका मतलब 1985 से 2018 तक कोई विमान शामिल नहीं हुआ।’ करीब आधे घंटे के बाद CJI ने कहा कि वह अधिकारियों से इतना ही जानना चाहते थे और उन्होंने अफसरों से अपने दफ्तर जाने को कहा। CJI ने कहा, ‘एयर मार्शल्स अब जा सकते हैं। यह एक अलग तरह का वॉर रूम है और आप सभी अपने वॉर रूम्स में जा सकते हैं। धन्यवाद।’ कोर्ट की सुनवाई इसके बाद भी जारी रही। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीद सौदे की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिकाओं पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

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