यहां बहती हैं सीता-राम और लक्ष्मण धारा, इस कुंड में समा गई देवी सीता



(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली।रामायण में कथा है कि देवी सीता धरती से ही प्रकट हुई थीं और अंत में धरती में समा गईं। जिस स्थान पर देवी सीता भूमि में समाई थीं उस स्थान को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। एक मान्यता के अनुसार देवी सीता जहां धरती में समाई थीं वह स्थान आज नैनीताल में है। इस स्थान का रामायण में बड़ा महत्व है क्योंकि यहीं पर देवी सीता ने अपने जुड़वां पुत्रों लव और कुश को जन्म दिया था। यह स्थान ऐसा है जहां आकर आप हैरान रह जाएंगे क्योंकि घने जंगलों के बीच में जहां जमीन पर कदम रखना भी खतरनाक माना जाता है क्योंकि कभी भी बाघ का हमला हो सकता है और मतवाले हाथी आक्रमण कर सकते हैं वहां एक खुले मैदान में देवी सीता का मंदिर है। आइए जानें इस मंदिर और स्थान के बारे में रोचक बातें।

1/9 जब श्रीराम ने माता सीता को अयोध्या से निकाला

देवी सीता के जीवन से संबंधित यह स्थान नैनीताल का जिम कार्बेट नेशल पार्क है जो बाघों के लिए संरक्षित क्षेत्र घोषित है। यहां कभी महर्षि बाल्मीकि का आश्रम हुआ करता था। भगवान राम द्वार देवी सीता को अयोध्या से निकाले जाने के बाद लक्ष्मणजी देवी सीता को यहीं छोड़ आए थे। यहीं पर देवी सीता ऋषि के आश्रम में रहीं इसलिए इस स्थान को सीताबनी के नाम से जाना गया।

2/9 यहां हुआ लव-कुश का जन्म

रामायण की कथा के अनुसार जिस समय भगवान राम ने देवी सीता को वनवास का आदेश दिया था उस समय देवी सीता गर्भवती थीं। ऋषि बाल्मीकि के आश्रम में ही इन्होंने अपने जुड़वां पुत्रों को जन्म दिया था और इनका पालन-पोषण किया था। इस घटना की याद मेंं सीताबनी में देवी सीता की प्रतिमा के साथ उनके दोनों पुत्रों को भी दिखाया गया है।

3/9 इन धर्म ग्रंथों में मिलता है सीताबनी का जिक्र 

सीताबनी का उल्लेख कई धर्म ग्रंथों में मिलता है। रामायाण, स्कंदपुराण और महाभारत में भी इस तीर्थ के महत्व को दर्शाया गया है। महाभारत के 83वें अध्याय में वर्णित श्लोक संख्या 49 से 60 श्लोक तक सीताबनी का उल्लेख किया गया है।

4/9 स्कंदपुराण में मिलता है यह वर्णन

स्कंदपुराण में जिन सीतेश्वर महादेव की महिमा का वर्णन किया गया है, वह यहीं विराजित हैं। स्कंदपुराण के अनुसार, कौशिकी नदी, जिसे वर्तमान में कोसी नदी कहा जाता है के बाईं ओर शेष गिरि पर्वत है। यह सिद्ध आत्माओं और गंधर्वों का विचरण स्थल है।

5/9 यहां सीता को वन में छोड़ा था लक्ष्मणजी ने

इसी के पास स्थित है लक्ष्मणपुरा। लक्ष्मणपुरा वह स्थान बताया जाता है, जहां लक्ष्मणजी देवी सीता को अपने रथ से उताकर वन में छोड़ गए थे। तब उदास सीता ने बाल्मीकि ऋषि के आश्रम में शरण ली थी।

6/9 यहां पड़ी थी श्रीराम से लव-कुश के युद्ध की नींव

आश्रम के पास ही रामपुरा नामक स्थान है। बताया जाता है कि यही वह स्थान है, जहां लव-कुश ने भगवान राम द्वारा छोड़ा गया अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा पकड़ा था।

7/9 यहां राम-सीता ने संग में की थी महादेव की पूजा

माता सीता संग भगवान राम ने वैशाख मास में इसी स्थान पर महादेव का पूजन किया था। इसी कारण इस मंदिर को सीतेश्वर महादेव का मंदिर कहा जाता है।

8/9 इस कुंड में समा गईं देवी सीता

यहां स्थित मंदिर के पुजारीजी के अनुसार, दो पहाड़ियों के बीच की खाई और खाई में स्थित कुंज की वह स्थान है जहां से माता सीता धरती में समा गई थीं। पुजारीजी का कहना है कि देवी सीता की पुकार पर धरती माता ने पहाड़ी को दो भागों में चीर दिया था और देवी सीता को अपनी गोद में स्थान दिया।

9/9 सीता-राम और लक्ष्मण धारा

सीता बनी में जल की तीन धाराएं स्थित हैं। इन्हें सीता-राम और लक्ष्मण धारा कहा जाता है। इन धाराओं की विशेषता यह है कि गर्मियों में इनका जल ठंडा और सर्दियों में गर्म रहता है।

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