28 सितम्बर : भारत की स्वर कोकिला “लता मंगेशकर” जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं, राष्ट्र कर रहा दीर्घायु की प्रार्थना

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली। ये भारत की स्वर कोकिला भी बोली जाती हैं और इनकी आवाज और इनके नाम से शायद ही कोई हो जो परिचित हो। फिल्म जगत का एक ऐसा नाम जो मुंबई के बॉलीवुड से निकला और गाँव के कोने कोने तक पहुच गया था। सदा किसी वाद विवाद से कोसो दूर, बिना किसी दिखावे और शोर शराबे के अपने जीवन काल में सफलता का उच्चतम शिखर मापने वाली लता जी का आज जन्मदिवस है जिस मौके पर देश उनके दीर्घायु होने की कामना कर रहा है। लता जी के जन्मदिवस पर देश की लगभग हर नामचीन हस्तियों ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं और उनके गीतों को खुद ही गुनगुनाया है।

संघर्षो से ही शुरुआत हुई थी लता जी के जीवन की। बहुत कम समय के अन्दर ही सर से पिता का साया उठ गया था लेकिन उन्होंने इस विपत्ति को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और अपने पिता को ही अपनी प्रेरणा बना डाली . यही प्रेरणा आगे चल कर उन्हें भारत के सर्वोच्च पुरष्कार भारत रत्न से विभूषित करवाई। आज उन्ही ‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर जी 89वां जन्मदिन है। सुरों की देवी और मां सरस्वती की उपासक लता मंगेशकर के जन्मदिन पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी है। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा है कि मैं लता दीदी के जन्मदिन पर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और उनकी लंबी उम्र और स्वस्थ जीवन की कामना करता हूं।

मध्य प्रदेश के इंदौर में 28 सितंबर 1929 को जन्मीं कुमारी लता दीनानाथ मंगेशकर रंगमंचीय गायक दीनानाथ मंगेशकर और सुधामती की पुत्री हैं। चार भााई-बहनों में सबसे बड़ी लता को उनके पिता ने पांच साल की उम्र से ही संगीत की तालीम दिलवानी शुरू की थी बहनों आशा, उषा और मीना के साथ संगीत की शिक्षा ग्रहण करने के साथ साथ लता बचपन से ही रंगमंच के क्षेत्र में भी सक्रिय थीं। जब लता सात साल की थीं, तब उनका परिवार मुंबई आ गया, इसलिए उनकी परवरिश मुंबई में हुई।

वर्ष 1942 में दिल का दौरा पड़ने से पिता के निधन के बाद लता ने परिवार के भरण पोषण के लिए कुछ वर्षो तक हिंदी और मराठी फिल्मों में काम किया, जिनमें प्रमुख हैं ‘मीरा बाई’, ‘पहेली मंगलागौर’ ‘मांझे बाल’ ‘गजा भाऊ’ ‘छिमुकला संसार’ ‘बड़ी मां’ ‘जीवन यात्रा’ और ‘छत्रपति शिवाजी’ लेकिन लता की मंजिल तो गायन और संगीत ही थे लेकिन मंजिल आसान नहीं थी। लता को भी सिनेमा जगत में कॅरियर के शुरुआती दिनों में काफी संघर्ष करना पड़ा। उनकी पतली आवाज के कारण शुरुआत में संगीतकार फिल्मों में उनसे गाना गवाने से मना कर देते थे।

1947 में आई फिल्म ‘आपकी सेवा में’ में गाए गीत से लता को पहली बार बड़ी सफलता मिली और फिर उन्होंने पीछे पलट कर नहीं देखा। आज लता जी के जन्मदिवस पर NLN परिवार उन्हें बारम्बार शुभकामनाएं देते हुए उनके दीर्घायु होने की इश्वर से कामना करता है। 

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