बालिका आवास गृह में बच्चियों के साथ हो रहे यौन शोषण का पर्दाफ़ाश करने वाली महिला थानेदार

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : मुजफ्फरपुर। बच्चों के साथ आए दिन यौन शोषण, छेड़खानी और रेप की घटनाएं बढ़ती जा रहीं हैं। जोकी समाज और देश के लिये चिंता का विषय हैं। समाज में बाल यौन शोषण की घटनाओं का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। चाइल्ड सेक्स अब्यूजमेंट पर किये गये एक अध्ययन के मुताबिक भारत में यौन शोषण का शिकार बच्चों की संख्या विश्व में सर्वाधिक हैं। भारत में प्रत्येक 10 बच्चों में एक बच्चा यौन शोषण का शिकार होता है। चाहे पिता द्वारा अपनी ही बेटी से दुष्कर्म की घटना हो या फिर कभी शिक्षक द्वारा विद्यार्थी के साथ यौन उत्पीड़न का मामला आये दिन इस तरह की घटनाएं पूरे समाज को शर्मसार करती हैं। फिर प्रश्न ये उठता है कि हमारे देश की बेटियाँ सुरक्षित कहाँ है। अभी मुजफ्फरपुर के बालिका आवास गृह की शर्मनाक घटना बहुत चर्चे में है। जिसमें बड़े-बड़े पदाधिकारिओं और मंत्रियों तक का नाम सामनें आ रहा है। आये दिन परतें खुल रही है और खुलासे हो रहे हैं। पर इन सबके पीछे बहुत बड़ा हाथ है एक महिला थानेदार का। जिसकी कड़ी मेहनत की वजह से इस केस को नई दिशा मिली।

इनका नाम है ज्योति कुमारी। ज्योति बिहार स्थित मुजफ्फरपुर के महिला थाने की थानेदार हैं। साथ ही वे मुजफ्फरपुर के साहू रोड स्थित बालिका आवास गृह में नाबालिक बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न के केस की आईओ (इन्फोर्मेशन ऑफिसर) भी हैं। इस केस की निष्पक्ष जाँच और सच्चाई उजागर करने के लिए मुजफ्फरपुर के लोग और खुद मुजफ्फरपुर शहर की एसएसपी हरप्रीत कौर उन्हें इस केस का हीरो मानती हैं। क्योंकि इस केस में बड़े बड़े नाम शामिल होने के बावजूद उन्होंने निष्पक्षता से जाँच मर सच को उजागर किया।

दरअसल, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़, मुंबई की एक संस्था है। इनका काम है सोशल ऑडिट करना। इसी संस्था की एक टीम ‘कोशिश’ ने 2017-18 में बिहार के सभी बालिका गृहों का सोशल ऑडिट किया था। बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा मिले निर्देशों के बाद ही ये ऑडिट किया गया था। ऑडिट ख़त्म होने के बाद इस टीम ने 15 मार्च को बिहार सरकार को पूरे 100 पन्नों की ऑडिट रिपोर्ट भेजी थी, जिसके पेज नंबर 51 पर इस बात का ज़िक्र किया गया था कि मुजफ्फरपुर में स्थित बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति में लड़कियों का यौन शोषण हो रहा है। रिपोर्ट के साथ ही इस स्वयंसेवी संस्था सेवा संस्थान संकल्प एवं विकास समिति के ख़िलाफ़ कार्रवाई और केस दर्ज करने के साथ ही पूरे मामले की जांच करवाने की बात भी की गई थी। रिपोर्ट की एक कॉपी मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन को भी 26 मई को सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन ने भी अपनी प्राथमिक जांच में कोशिश टीम के द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि की।

इसके बाद 31 मई 2018 को मुजफ्फरपुर के बाल संरक्षण के सहायक निदेशक दिवेश शर्मा के निर्देश पर बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर और विनीत और संस्था के कर्मचारियों-अधिकारियों पर यौन शोषण, आपराधिक षड्यंत्र और पॉक्सो ऐक्ट के तहत महिला थाने में केस दर्ज किया गया। इस पूरे मामले की जांच की ज़िम्मेदारी महिला थाने की थानेदार ज्योति कुमारी को दी गई। ज्योति नें इस केस की जाँच शुरू की और ताबड़तोड़ छापे मारने शुरू किए। ज्योति और उनकी टीम में दो महिला सिपाही, एक महिला और एक पुरुष ड्राइवर शामिल थे।

ज्योति कुमारी ने साहू रोड स्थित बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति के ऑफ़िस से विज़िटर रजिस्टर, स्टाफ़ रजिस्टर, एक कैसेट और कई कागज़ातों को सबूत के तौर पर इकट्ठा किया। बालिका गृह की सभी 44 बच्चियों को मुजफ्फरपुर से बाहर शहरों के आवास गृह तक सुरक्षित शिफ्ट किया गया। इसके बाद 2 जून को ज्योति की टीम, एसएसपी हरप्रीत कौर के साथ बालिका गृह पहुंची और निरीक्षण के बाद वहां ताला लगा दिया। 3 जून को ज्योति की टीम ने बालिका गृह सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संचालक ब्रजेश ठाकुर समेत वहां काम करने वाली किरण कुमारी, चंदा कुमारी, मंजू देवी, इंदु कुमारी, हेमा मसीह, मीनू देवी और नेहा को हिरासत में ले लिया।

कार्यवाही के दौरान इसी बात के संकेत मिल रहे थे कि इस बालिका गृह में बहुत कुछ ऐसा है जो गड़बड़ है। और ये बात सच भी निकली क्योंकि यहां मासूमों का यौन शोषण तो हो ही रहा था, साथ ही बालिका गृह की 29 लड़कियों का बलात्कार भी हो रहा था। जब इन बच्चियों का मेडिकल टेस्ट कराया गया, तब बलात्कार की पुष्टि होने के साथ-साथ 3 बच्चियों के गर्भवती होने की बात भी सामने आई। ज्योति और उनकी टीम के किये बच्चियों को मेडिकल टेस्ट के लिए मनाना आसान नहीं था पर उन्होंने बच्चियों को किसी तरह मनाया। बाद में बच्चियाँ उनसे इस बात में लिए गुस्सा भी करती थीं। केस के दौरान ज्योति नें उन बच्चियों के साथ दोस्ताना संबंध स्थापित कर लिया था। ज्योति को उनमें से ज्यादातर बच्चियों को कौन सी आइसक्रीम पसंद है, कौन सा रंग पसंद है और क्या पसंद नहीं, सब कुछ पता है।

आज यह केस इस स्तर पर पहुँच पाया है तो इसमें एक बड़ा योगदान ज्योति का है जिन्होंने इस केस में अपनी जान लगा दी। ज्योति ने इन बच्चियों के दर्द बहुत करीब से समझा क्योंकि वह भी 8 साल की बच्ची की माँ हैं।आज मुजफ्फरपुर का हर शख्स यहाँ तक कि वहां की एसएसपी हरप्रीत कौर भी उनकी काम की तारीफ करते नहीं थकती।

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