“हिंदुत्व पर जिहादी ताकतों तथा ईसाई मिशनरियों का चौतरफा हमला”, ईसाई बनाने के लिए गरीब बच्चे हो रहे है सप्लाई

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : नई दिल्ली। हिन्दू विरोधी ताकतें लगातार हिंदुत्व पर किसी न किसी बहाने से हमले कर रही हैं तथा इसमें सबसे बड़ा हथियार है धर्मान्तरण। जी हाँ धर्मान्तरण के इस खेल में हिंदुत्व पर जिहादी ताकतों तथा ईसाई मिशनरियों का चौतरफा हमला हो रहा है। ताजा मामला पंजाब के लुधियाना से है जहाँ बिहार तथा झारखण्ड से गरीब बच्चों को लाया जा रहा है तथा उनको ईसाई बनाया जा रहा है। खबर के मुताबिक, धर्मांतरण के लिए झारखंड और बिहार से नाबालिगों को लुधियाना के एक बालगृह भेजा जा रहा है। पंजाब के लुधियाना के पैस्किम मैरी क्रास बालगृह, इंद्रनगर में झारखंड के 34 और बिहार के चार बच्चों को रखा गया था। झारखंड के 34 में से 30 बच्चे चाईबासा से जबकि दो-दो खूंटी और रांची जिले से लाए गए थे। पुलिस इनमें चार बच्चों को झारखंड वापस ला रही है। लेकिन बाकी बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला है।

पंजाब के लुधियाना स्थित बाल कल्याण समिति के संजय माहेश्वरी ने बताया कि पैस्किम मैरी क्रास बालगृह धर्मांतरण कर बच्चों को यहां रखा जाता था। इस मामले में चाईबासा के एक शख्स को भी चिन्हित किया गया है। वह अपने जिले के बच्चों को लाकर लुधियाना के पैस्किम मैरी क्रास बालगृह में रखता था। बिहार के सत्येंद्र प्रकाश मूसा नामक व्यक्ति को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। बाल कल्याण समिति के मुताबिक अच्छी शिक्षा व बेहतर परवरिश का प्रलोभन देकर बच्चों के परिजनों को झांसे में लिया जाता था. इसके बाद उनका धर्मांतरण कराया जाता था। गुरुवार को चाईबासा के एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के थाना प्रभारी बनारसी राम अपनी टीम के साथ लुधियाना पहुंचे। वे पहले एक सरकारी शेल्टर होम पहुंचे। पैस्किम मैरी क्रास बालगृह को सील किए जाने के बाद वहां के आठ बच्चों को सरकारी शेल्टर होम में रखा गया था। आठ में तीन लड़कियों समेत चार बच्चे झारखंड के रांची और खूंटी के हैं, जबकि बाकी चार बिहार के रहने वाले हैं। झारखंड के बच्चों को पुलिस वापस ला रही है। हालांकि, पैस्किम में रखे गए झारखंड के बाकी 30 बच्चों का सुराग नहीं मिल पाया है। आशंका है कि उन्हें बालगृह के संचालकों ने मामले का खुलासा होने के डर से गुपचुप तरीके से चाईबासा भेज दिया है। हालांकि, गुरुवार देर शाम तक बच्चे चाईबासा भी नहीं पहुंचे हैं। 

बताया गया है कि नौ अगस्त को बच्चों को गलत तरीके से पैस्किम मैरी बालगृह में रखने की जानकारी मिली थी। तब लुधियाना के डिप्टी कलक्टर को पत्र लिखकर पुलिस सुरक्षा की मांग की गई थी। स्थानीय पुलिस ने तब कार्रवाई नहीं की। 16 अगस्त को चाईबासा के अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद 21 अगस्त को सीडब्ल्यूसी की टीम बालगृह गई तो वहां के लोगों ने बवाल काटा। हंगामे की सूचना पाकर स्थानीय पुलिस वहां पहुंची। इसके बाद बालगृह के लोगों ने थाना और सीडब्ल्यूसी को लिखित दिया था कि बच्चों को वहां से हटाया नहीं जाएगा। लेकिन, इसके बाद चोरी छिपे 30 बच्चों को वहां से हटा दिया गया तथा बाद में इसे सील कर दिया गया। संजय माहेश्वरी ने बताया कि झारखंड से अब तक कितने बच्चों को लाया गया, कितने का धर्मांतरण कराया गया, इन पहलुओं की जांच की जा रही है. बालगृह के जेजे एक्ट के तहत निबंधित नहीं होने की भी बात सामने आई है।

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