बोरवेल में फंसी मासूम बच्ची को बचा ली गई

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): 110 फीट गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की सना को करीब 29 घंटे तक ऑपरेशन चलाकर निकाल लिया गया है। मिट्टी गीली रहने के कारण बचाव दल को सना तक पहुंचने में काफी परेशानी झेलनी पड़ी। मुंगेर सदर अस्‍पताल में इलाज कर रहे डॉक्‍टरों ने उसकी हालत को सामान्‍य बताया है। हालांकि, उसके सिर में सूजन आ गई है। ऐसा लंबे समय तक मिट्टी में दबे होने के कारण हुआ है। जरूरी हुआ तो उसे इलाज के लिए बाहर भेजा जा सकता है। बिहार के राज्‍यपाल सत्‍यपाल मलिक, मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार व उपमुख्‍यमंत्री सुशील मोदी ने सना को सकुशल बाहर निकालने के लिए रेस्‍क्‍यू टीम को बधाई दी है। मुख्‍यमंत्री ने उसके इलाज की पूरी व्‍यवस्‍था करने का आदेश दिया है। शहर के मुर्गिया चक इलाके में मंगलवार अपराह्न तीन बजे सना बोरवेल में गिर गई गई थी। वह 45 फीट नीचे जाकर प्लास्टिक के पाइप से अटक गई थी। इसके बाद से ही स्थानीय लोग और प्रशासन की टीम उसे सुरक्षित निकालने में जुट गए थे। प्रशासन ने भागलपुर और खगडिय़ा से एसडीआरफ, एनडीआरएफ और सेना को भी सहायता के लिए बुलाया था। इस बीच मौके पर मौजूद डॉक्टरों की टीम लगातार बच्ची की एक-एक हरकत पर नजर बनाए थी। उसे लगातार पाइप से अॉक्सीजन दिया जा रहा था। सना तक पहुंचने के लिए बचाव दल ने बोलवेल से करीब 10 फीट की दूरी पर 42 फीट गहरा गड्ढ़ा खोदा गया था। जेसीबी और पोकलेन की मदद से करीब 32 फीट गहरा करने के बाद मजदूरो की सहायता ली गई। स्थानीय लोगों की सलाह पर प्रशासन ने इसके लिए कुआं और कब्र खोदने वाले मजदूरों को काम में लगाया। इससे काम में तेजी आई। हालांकि रह-हरकर होने वाली बारिश ने काम प्रभावित किया।बुधवार दोपहर एक बजे के करीब गड्ढा खोदने का काम पूरा कर लिया गया। इसके बाद लेड लाइट की सहायता से बचाव दल दल ने 10 फीट लंबा सुरंग खोदना शुरू किया। यह काम शाम साढ़े सात बजे तक पूरा कर लिया गया। मिट्टी में गीलापन रहने के कारण बचाव दल को बच्ची तक पहुचने में आधा घंटा लग गया। शाम 7:55 बजे जब एनडीआरएफ की टीम ने बच्ची के पास पहुंचकर रोशनी जलाई तो सबने राहत की सांस ली। बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए प्रशासन ने पटना से एनडीआरएफ की टीम को बुलाया। बुधवार अपराह्न तीन बजे 22 सदस्यीय एनडीआरएफ की टीम ने एसडीआरएफ के साथ मिलकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों ने भी पूरी मदद की। घटनास्थल पर प्रमंडलीय आयुक्त पंकज कुमार पाल, डीआइजी जितेंद्र मिश्रा, एसपी गौरव मंगला, डीडीसी रामेश्वर पांडे, एएसपी हरिशंकर प्रसाद, एसडीओ खगेश चंद्र झा कैंप कर बचाव कार्य का जायजा लेते रहे। प्रमंडलीय आयुक्त ने बताया कि उनके आग्रह पर पटना के उच्चाधिकारियों ने एनडीआरएफ की टीम को दोपहर लगभग ढाई बजे हेलीकॉप्टर रवाना कर दिया। एनडीआरएफ टीम मुंगेर के सफियाबाद हवाई अड्डा से सीधे घटनास्थल पर पहुंची और बचाव कार्य में जुट गई। बच्ची तक पहुंचने के लिए बचाव दल के पास सीमित विकल्प था। बोरवेल से नजदीक ही संकरी गली में गड्ढ़ा खोदने के काम शुरू किया गया। खोदाई के क्रम में यह ध्यान भी रखना था कि दोनों तरफ बने भवनों को नुकसान नहीं पहुंचे। वहीं मंगलवार रात साढ़े के बाद बूंदाबांदी और बारिश ने बचाव कार्य को प्रभावित किया। गीलापन बढ़ जाने से जेसीबी और पोकलेन ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद मजदूरों की सहायता ली गई। सना के निकलने की खबर मिलते ही चारों ओर खुशी का माहौल बन गया। उसके बोरवेल से निकलने से पहले मौके पर मौजूद जवानों ने सुरक्षा घेरा बना लिया था ताकि लोगों की भीड़ से परेशानी ना हो। वहां बीच-बीच में बारिश भी होती रही। बच्ची की सकुशल बरामदगी के लिये दुआओं का भी दौर लगातार जारी रहा। पटना समेत राज्य के अलग-अलग इलाकों से सना के लिये पूजा-पाठ और हवन किया जा रहे थे। राज्य सरकार ने भी घटना को गंभीरता से लिया  और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी घटना की पल-पल जानकारी ले रहे थे। पटना से लगातार अधिकारियों से बचाव कार्य की बाबत जानकारी ली जाती रही । मंत्री शैलेश कुमार ने कहा कि उन्होंने प्रमंडलीय आयुक्त और प्रभारी डीएम से बात की। राज्य सरकार इस मामले में बच्चों के परिजन के साथ है। बोरवेल में गिरी सना मुंगेर के नोट्रेडेम एकेडमी की मान्टेसरी की छात्रा है। 10 फरवरी 2015 को जन्मी सना बोरवेल में जिंदगी के लिए मौत से जंग लड़ती रही । वहीं, बाहर उसके लिए हजारों लोग दुआएं कर रहे थे। दो दिन पहले ही वह अपने पिता नचिकेता के साथ नाना उमेश नंदन साह के घर आई थी। मोहल्ले के उदय शंकर प्रसाद के घर हो रहे बोरिंग के लिए बोरवेल खोदा गया था। मंगलवार की दोपहर खेलने के क्रम में वह बोरवेल में गिर गई थी। बताया जा रहा है कि इस बोरवेल की खुदाई में प्रावधानों की अवहेलना की गई है। विदित हो कि बोरवेल में बच्‍चों के गिरने की कई घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने मार्च 2009 में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के के प्रावधान बनाने के लिए एक कमेटी गठित की। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर 2010 में संज्ञान लिया। कोर्ट ने सभी बेकार पड़े खुले बोरवेल को ढ़कने तथा चालू बोरवेल को घेरने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी मॉनिटरिंग का दायित्‍व पंचायती राज संस्‍थाओं, नगर निकायों जथा लोक स्‍वास्‍थ्‍य अभियंत्रण विभाग को दिया। प्रावधानों के अनुसार बोरवेल ऑपरेटरों को संबंधित क्षेत्रीय ट्रांसपोर्ट कार्यालय में निबंधन कराना अनिवार्य है। बोरवेल की खुदाई के दौरान वाहन पर इस निबंधन संख्‍या का जिक्र करना अनिवार्य है। ऑपरेटर को 15 दिनों के अंदर खोद गए बोरवेल की संख्‍या, गहराई व आकार की जानकारी प्रशासन को देना भी अनिवार्य है। खुदाई के बाद बोरवेल ऑपरेटर तथा जमीन मालिक काे यह संयुक्‍त घोषणा पत्र देना है कि काम पूरा करने में प्रावधानों को पालन किया गया।

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