असम के 14 जिलों में CRPF की धारा 144 के तहत 220 कंपनियां तैनात

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : असम। असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) का फाइनल ड्राफ्ट जारी हो गया है। इस लिस्ट में 40 लाख लोगों की नागरिकता अवैध घोषित कर दी गई है। मामले की नजाकत को देखते हुए वहां सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और किसी भी तरह अप्रिय घटना को टालने की कोशिश की जा रही है।

असम में बांग्लादेश से नागरिक आते रहे हैं. मौजूदा प्रक्रिया साल 2005 में कांग्रेस शासन के दौरान शुरू हुई थी और बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इसमें तेजी आई। इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि 31 दिसंबर तक एनआरसी का पहला मसौदा प्रकाशित किया जाए। 

एनआरसी पर लेकर लोगों में डर के माहौल को देखते हुए पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राज्य में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए समूचे राज्य में सुरक्षा बढ़ाई गई। इसके लिए हर जिले के जिला उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को कड़ी सतर्कता बरतने को कहा गया है।

असम के बारपेटा, दरांग, दीमा, हसाओ, सोनितपुर, करीमगंज, गोलाघाट और धुबरी समेत कुल 14 जिलों में सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लगाई गई है. असम में 33 जिले आते हैं। 

हर जिले के पुलिस अधीक्षकों ने अपने-अपने संबंधित जिलों में संवेदनशील इलाकों की पहचान की है और किसी भी अप्रिय घटना खासकर अफवाह से होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए स्थिति पर बेहद सावधानी से निगरानी बरती जा रही है। 

असम और पड़ोसी राज्यों में सुरक्षा चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए केंद्र ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 220 कंपनियां भेजी है। इससे पहले 65 कंपनियां तैनात थीं, लेकिन स्थिति को देखते हुए इसे बढ़ाकर 220 कंपनियां तैनात कर दी गईं।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एनआरसी मसौदा जारी होने के मद्देनजर उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। और कहा कि ड्राफ्ट में मसौदे में जिन लोगों के नाम नहीं होंगे, उनके दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया की व्याख्या एवं हरसंभव मदद की जाए।

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) में उन सभी भारतीय नागरिकों के नाम, पते और फोटोग्राफ होंगे जो 25 मार्च, 1971 से पहले से असम में रह रहे हैं। 

देश में पहली बार जनगणना के बाद 1951 में लाया गया. इस लिस्ट में आखिरी अपडेशन असम के मामले में किया गया, जिसमें यहां के उन परिवारों को शामिल किया गया जिनके वंशजों के नाम 1951 से पहले था या फिर 24 मार्च, 1971 तक असम की निर्वाचन समिति में शामिल थे। 

इस दौरान 1 जनवरी, 1966 से 25 मार्च, 1971 के बीच जो लोग यहां आए, उन्हें अब खुद को फॉरेन रजिस्ट्रेशन रीजनल ऑफिसर में रजिस्टर्ड करवा रखा है, उन्हें अपनी नागरिकता साबित करनी होगी।

1 जनवरी, 2018 में जारी एनआरसी लिस्ट में असम में 3.29 करोड़ आवेदकों में 1.9 करोड़ लोगों ने यह बाधा पार कर ली थी।

इस महीने की शुरुआत में एनआरसी ने खुलासा किया कि पहली लिस्ट में शामिल 1.5 लाख लोगों को गलत जानकारी दिए जाने के बाद बाहर कर दिया गया है। इनमें से करीब 50 हजार ग्रामीण महिलाएं हैं।

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