महाराष्ट्र बस हादसा : 33 छात्रों के मौत की दर्दनाक कहानी !

घटनास्थल पर मृतकों के शव निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : सोचिए किसी ऐसी यात्रा के बारे में जहां पर आप अपने साथियों के साथ जानेवाले हों लेकिन कुछ आकस्मिक कारणों की वजह से न जा पाएं। आपके बाकी साथी अपनी ट्रिप के सारे अपडेट्स वॉट्सऐप ग्रुप पर डाल रहे हों। आप भी उस ट्रिप की एक्साइटमेंट को महसूस कर रहे हों और तभी वॉट्सऐप ग्रुप में सन्नाटा पसर जाए। कुछ देर बाद आपको पता चले कि एक सड़क दुर्घटना में सभी दोस्तों की मौत हो गई है। यह तो न किसी फिल्म की स्क्रिप्ट है न ही किसी किताब की कोई कहानी बल्कि यह हकीकत है शनिवार को महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में हुए बस हादसे की।दापोली ऐग्रिकल्चर यूनिवर्सिटी में साथियों के प्लान में प्रवीण रणदीवे को भी शामिल होना था। वे सभी शनिवार सुबह महाबलेश्वर में पिकनिक मनाने जाने की तैयारियों में जुटे हुए थे। प्रवीण की तबीयत खराब होने की वजह से वह पिकनिक पर नहीं जा पाए। वह पिकनिक पर तो नहीं गए लेकिन वॉट्सऐप ग्रुप पर साथियों का एक-एक अपडेट बड़ी उत्सुकता के साथ देख रहे थे। तभी अचानक वॉट्सऐप ग्रुप पर सन्नाटा पसर गया। दोपहर के लगभग 12 बजकर 30 मिनट हो चुके थे, प्रवीण को पता चलता है कि जिस बस में उनके दोस्त जा रहे थे वह पोलडपुर के नजदीक एक खाई में गिर गई। घटनास्थल प्रवीण से 180 किलोमीटर की दूरी पर था। हादसे के वक्त बस में सवार 34 लोगों में से 33 की मौत हो गई और उनमें से एक की जिंदगी ही बच पाई।रणदीवे ने मीडिया को बताया, ‘हम सुबह साढ़े 6 बजे निकलेवाले थे लेकिन जब उन्होंने मुझे बुलाया तो मैंने कहा कि मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है तो मैं नहीं जा सकता।’ इसके बाद रणदीवे के दोस्तों ने वॉट्सऐप ग्रुप पर यात्रा की तस्वीरें भेजनी शुरू कर दीं। वह बताते हैं, ‘आखिरी मेसेज लगभग 9 बजकर 30 मिनट पर आया था। वे सभी शायद नाश्ता करने के लिए कहीं रुकनेवाले थे। जब मैंने उन्हें मेसेज किया तो कोई जवाब नहीं आया। हमें दुर्घटना के बारे में लगभग साढ़े 12 बजे पता चला।’रणदीवे का कहना है, ‘मृतकों में शामिल सभी लोगों की उम्र 30 से 45 वर्ष के बीच थी। उनमें से कई तो ऐसे भी थे जिनकी शादी भी नहीं हुई थी।’ इस भयानक हादसे में सिर्फ प्रकाश सावंत नाम के शख्स की जिंदगी बच पाई।पोलाडपुर में सावंत ने मीडिया को बताया, ‘कीचड़ और पत्थरों के खिसकने की वजह से बस का टायर फिसल गया और ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया, जिसके चलते यह दुर्घटना हो गई।’ वह घाटी से सुरक्षित चढ़कर ऊपर आने में सफल रहे और उन्होंने ही घटना की सूचना सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर विश्वविद्यालय और पुलिस अधिकारियों को दी। रायगढ़ पुलिस नियंत्रण कक्ष के अधिकारी पी.डी. पाटील के मुताबिक, बस एक वीकली पिकनिक के लिए महाबलेश्वर के रास्ते पर थी, जहां यह घटना हुई। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर मृतकों के शव निकालने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा है। एजेंसी के मुताबिक, मारे गए 33 लोगों में से 12 के शव निकाले जा चुके हैं।सहायक निदेशक सावंत देसाई ने कहा, ‘मैं बाहर आने में सफल रहा और उसके बाद मैंने कोंकण कृषि विश्वविद्यालय के डॉक्टर बालासाहेब सावंत और पुलिस को फोन कर घटना की सूचना दी।’ उन्होंने कहा कि उन्हें 500 से ज्यादा फुट चढ़ना था, साथ ही घाटी में मोबाइल फोन के सिग्नल भी नहीं मिल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘ऊपर सड़क पर पहुंचने के बाद मैं मोबाइल रेंज में पहुंचा और उसके बाद मैंने पुलिस और विश्वविद्याल प्रशासन को फोन किया।’ बता दें कि इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट करके दुख व्यक्त किया है। पीएमओ के ट्विटर हैंडल पर पीएम मोदी की ओर से लिखा गया, ‘महाराष्ट्र के रायगढ़ में हुए बस हादसे में लोगों की मौत से काफी दुखी हूं। जान गवाने वालों के परिवार से मेरी पूरी सहानुभूति है।’ उधर, राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना पर शोक व्यक्ति किया है। सीएम ने ट्वीट कर कहा है कि उन्हें महाबलेश्वर बस हादसे में लोगों की मौत के बारे में जानकर दुख हुआ।

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