महाराष्ट्र के सतारा में संपन्न हुआ कौलान्तक पीठ का कुल देवी देवता साधना दीक्षा शिविर

कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्रनाथ ने साधकों को अध्यात्म, साधना और कुल देवी देवता के विषय में बहुमूल्य ज्ञान प्रदान किया

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण के संयोग के अवसर पर २७ और २८ जुलाई को सतारा में कौलान्तक पीठ का कुल देवी देवता साधना दीक्षा शिविर आयोजित किया गया था। यह शिविर महाराष्ट्र के सतारा जिल्हे के तलवई गांव में स्वयं कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्रनाथ (ईशपुत्र) के दिशा निर्देश में संपन्न हुआ।इस अविस्मरणीय दीक्षा शिविर में देश – विदेश के अनेकों भैरव भैरवियों ने हिस्सा लिया।
दीक्षा शिविर के प्रथम दिवस गुरु पूर्णिमा का अवसर होने के कारण कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्रनाथ और उनकी अर्धांगिनी माँ प्रिया सत्येन्द्रनाथ नाथ के आगमन हेतु रथ यात्रा का आयोजन किया गया।इस रथ यात्रा में कौलान्तक पीठ के भैरव भैरवियों के आलावा समस्त गांव वासियों ने भाग लिया।भैरव भैरवी महायोगी सत्येन्द्रनाथ और माँ प्रिया सत्येन्द्रनाथ पर फूल बरसा रहे थे और “कौलान्तक नाथ की जय” और “प्रिया ईशपुत्र की जय” ऐसे नारे लगा रहे थे। सब नाचते गाते हुए इस अविस्मर्णीय रथ यात्रा का आनंद लेते हुए दिखाई दिए। इस अवसर पर समस्त भैरव भैरवी और गांव वासी खुद को भाग्यशाली महसूस कर रहे थे। इस दौरान स्थानीय स्कूल के छात्रों ने एक नृत्य भी प्रस्तुत किया। रथ यात्रा साधना शिविर के स्थान पर पहुँची।यहां भैरव भैरवियों ने कौलान्तक पीठादीश्वर महायोगी सत्येन्द्रनाथ और माँ प्रिया सत्येन्द्रनाथ का कौल परंपरा के अनुसार गुरु पादुका पूजन प्रारम्भ किया। भैरव भैरवियों ने उनके चरणों का पंचोपचार पूजा किया और उन्हें दंडवत प्रणाम किया।भैरव भैरवियों ने उन्हें अनेकों उपहार प्रस्तुत किए।कौलान्तक पीठादीश्वर महायोगी सत्येन्द्रनाथ और माँ प्रिया सत्येन्द्रनाथ ने भैरव भैरवियों को आशीर्वाद प्रदान किया।कौलान्तक पीठ के भैरव भैरवियों और गांव वासियों के लिए ये अविस्मर्णीय पर्व था।
कौन होते है कुल देवी देवता ?
सिद्ध धर्म की मान्यताओं  के अनुसार कुल देवी देवता परिवार के देवी देवता का प्रतिक स्वररूप होते है। इस कारण वह कोई वास्तविक देवी देवता या कोई प्रकृति में मौजूद वस्तु अथवा जानवर भी हो सकते है। जिस प्रकार नेपाल के मुस्तांग घाटी में रहने वाले लोग याक को शिव के प्रतीक के तौर पर अपना कुल देवता मानते है। कौल कुल के कुल देवी देवता स्वयं माँ कुरुकुल्ला और स्वछंद भैरव है।इसी प्रकार माँ महाकाली कौलान्तक पीठ की कुल देवी मानी जाती है।भले ही आधुनिक युग में कुल देवी देवताओं की उपासना ना होती हो वह सदैव कुल और परिवार की समस्त विघ्नों और संकटों से रक्षा करते है। आस्तिक परंपरा शिव शक्ति के अनेकों स्वरूपों को कुल देवी देवता के तौर पर पूजती है वहीं नास्तिक परंपरा प्रकृति में मौजूद शक्तियों, जानवरों, पहाड़ों, पेडों, झरनों, फूलों, नदियों आदि को अपने कुल देवी देवता के रूप में पूजते है।कुल देवी देवता साधक  के लिए एक प्रतीक के तौर पर काम करते है, जिस से वह माया और सत्य के बीच अंतर कर सके और माया के पार आध्यात्मिक सत्य से जुड़ सके।

दीक्षा शिविर के दूसरे दिवस पर भैरव भैरवियों द्वारा कुल देवी देवता यंत्र निर्माण कर आवरण पूजन और अन्य कर्मकांड संपन्न किया गया। कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्रनाथ ने भैरव भैरवियों को कुल देवी देवता साधना के आध्यात्मिक पक्ष के विषय में ज्ञान प्रदान किया।शाम को हवन का आयोजन हुआ।रात्रि के समय मंत्र दीक्षा और शक्ति दीक्षा प्रदान की गई। कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येन्द्रनाथ ने भैरव भैरवियों के अनेकों प्रश्नों के उत्तर दिए और शंकाओं का निरूपण किया।उन्होंने भैरव भैरवियों को सदैव साधना के प्रति निष्ठा बनाये रखने, सदैव धर्म के मार्ग पर चलने और उसकी रक्षा करने का उपदेश किया।

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