अपराधियों के निशाने पर कौलान्तक पीठ के पीठाधीश्वर।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) दिल्ली: कहते हैं जब किसी व्यक्ति में साहस और प्रसिद्धि का मिलन हो जाए। तब ऐसे व्यक्ति से जल भून कर राख होने वालों की लम्बी कतारें लग जाती हैं। ‘कौलान्तक पीठ हिमालय’ के विश्व प्रसिद्द ‘पीठाधीश्वर’ ‘महायोगी सत्येंद्र नाथ’ जिनको ‘ईशपुत्र’ के नाम से जाना जाता है। लम्बे समय से अपराधियों के निशाने पर हैं। आये दिन ‘सोशल मीडिया’ में ‘ईशपुत्र’ के खिलाफ लिखना और उनकी छवि को धूमिल करने की कोशिश करना इन आपराधिक तत्वों का शौक बन गया है। ज्ञात हो कि इससे पहले भी हिमाचल के सराज क्षेत्र के एक बकील द्वारा ऐसा ही कुप्रयास किया गया था। जिसके ख़िलाफ़ आईटी एक्ट में शिकायत दर्ज़ होने पर, उक्त बकील ने रातों-रात पोस्ट डिलीट कर दी थी। अब शनिवार 22 जुलाई को एक अन्य प्रोफाइल बनाया गया है जिसमें बिना अनुमति के ‘ईशपुत्र’ की तस्वीरों को अपलोड कर ‘अखंड ब्राह्मण रावण’ नाम का फेसबुक प्रोफाइल बनाया गया है। जो कि ‘कौलान्तक पीठ’ और ‘ईशपुत्र’ की छवि को धूमिल करता है। ऐसे में ‘न्यूज़ लाइव नाऊ’ ने जब ‘कौलान्तक पीठ’ को इसके सम्बन्ध में सूचित किया तो ‘कौलान्तक पीठ’ के प्रवक्ता का कहना था कि वो जल्द ही इस अपराधी व्यक्ति के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज़ करवाएंगे। ज्ञात हो कि उक्त प्रोफाइल में बिना अनुमति ‘ईशपुत्र’ की तस्वीरों को ‘कौलान्तक पीठ’ के फेसबुक पेज से उठाया गया है। हालाँकि प्रथम दृष्टया ये काम किसी जानने वाले का ही लगता है जिसकी तलाश पुलिस जल्द ही करेगी। ये अपराधी व्यक्ति इतने पर ही नहीं रुके इन्होंने ‘कौलान्तक पीठ’ से जुड़े सभी व्यक्तिओं को भी फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज डाली। अब देखना ये है कि उक्त अपराधियों की मंशा क्या है और ये इस बार क्या खेल खेलना चाहते हैं? ऐसे में पुलिस प्रशासन को भी ‘ईशपुत्र’ की सुरक्षा को ले कर गंभीर हो जाना चाहिए। क्योंकि ये तो शुरुआत भर ही है। हो सकता है ये किसी बड़े षडयंत्र का एक छोटा सा हिस्सा हो। इन लगातार हो रहे ऐसे षड्यंत्रों की तह तक पहुँचना जरूरी है। साथ ही ‘कौलान्तक पीठ’ को भी ‘ईशपुत्र’ की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। कहीं ये लापरवाही भारी ना पड़ जाए। आखिर कौन हैं ईशपुत्र? ईशपुत्र का असली नाम ‘महायोगी सत्येंद्र नाथ’ है। ईशपुत्र हिमालय की परम्परा ‘कौलान्तक पीठ’ के वर्तमान ‘पीठाधीश्वर’ व ‘सिद्ध धर्म’ के संस्थापक हैं। भारत सहित कई देशों में ‘ईशपुत्र’ को मानने वालों का एक बड़ा कुनवा है। सिद्धों के ज्ञान प्रसार में इनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। नई पीढ़ी के युवक और आध्यात्मिक लोग इनको बहुत पसंद कर रहे हैं। क्योंकि इनका अंदाज़ आजकल के बाबाओं जैसा नहीं है। इसी कारण इनके चाहने वालों की लम्बी कतार है तो वहीँ इनसे जलने वालों का भी लंबा कुनवा। देश ही नहीं विदेशों में भी इनको लोग बड़ी गंभीरता से सुनते हैं। ‘ईशपुत्र’ को प्राचीन आध्यात्मिक परम्पराओं का माहिर कहा जाता है। इनको बहुत ही दुर्लभ लिपियों और कलाओं का ज्ञान प्राप्त है। वर्तमान में भी देश और देश के बाहर ‘स्पिरिचुअल कैम्प्स’ का आयोजन कर नई पीढ़ी को पुरातन ज्ञान पढ़ा व सीखा रहे हैं।

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