13 जुलाई – सूर्य ग्रहण के दौरान कभी ना करें ये काम, नहीं तो हो सकता है नुकसान

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : 13 जुलाई को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण पड़ने वाला है। इस जुलाई के महीने में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण दोनों पड़ेंगे। अषाढ़ कृष्ण की अमावस्या को सूर्य ग्रहण हालांकी भारत में यह ग्रहण आंशिक होगा इसका प्रभाव हमें भारत में देखने को नहीं मिलेगा। लेकिन इसके बाद भी ग्रहण का सूतक भारत में माना जाएगा। यह भारत में इसका प्रभाव भले ही ना हो लेकिन राशियों पर इसका असर जरुर पड़ेगा। 13 जुलाई 2018 को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण का असर दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न, स्टीवर्ट आईलैंड और होबार्ट में दिखाने को मिलेगा। ग्रहण का प्रभाव सभी सजीव जीवों पर पड़ता है। ग्रहण काल में सूतक के नियमों का विशेष रुप से ध्यान रखना चाहिए। आईये जानते हैं की हमें सूतक के समय किन चीज़ों का नहीं करना चाहिए और किन चीज़ों को करना शुभ होगा।

क्या होता है सूतक- सूतक समय को शास्त्रों में अशुभ मुहूर्त का समय माना जाता है। यदि हम साधारण शब्दों में बताएं तो इस समय में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते और ना ही भगवान की पूजा होती है, ना ही देव दर्शन किए जाते हैं। धार्मिक नियमों के अनुसार सूर्य ग्रहण के 12 घंटे से पूर्व ही सूतक लग जाता है इस कारण ही मंदिरों के पट भी बंद कर दिए जाते है। यह ग्रहण समाप्ति के मोक्ष काल के बाद स्नान धर्म स्थलों को फिर से पवित्र करने की क्रिया के बाद ही समाप्त होता है।

ग्रहण काल के समय क्या करना चाहिए क्या नहीं- ग्रहन काल शुरु होने से समाप्त होने तक मंत्रों का जाप, उपासना, पाठ व मानसिक जाप करना चाहिए ये आपके लिए शुभ होता है। सूर्य ग्रहण के दौरान देव मूर्तियों को स्पर्श नहीं करना चाहिए। सूतक का समय खत्म होने के बाद स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। देवमूर्तियों को स्नान करा कर, गंगाजल छिडक कर, नए वस्त्र पहनाकर, देवों का श्रंगार करना चाहिए। देव प्रतिमाओं के अलावा तुलसी वृ्क्ष, शमी वृ्क्ष को स्पर्श नहीं किया जाता है। ग्रहण के बाद इन सभी पर भी गंगाजल छिडक कर इन्हें शुद्ध किया जाता है। ग्रहण काल में अपने इष्ट देव, मंत्र, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र आदि का जाप दीपक जला कर करना चाहिए। मंत्रों की सिद्धि के लिए यह समय सर्वथा शुभ होता है।

ग्रहणकाल में ना करें ये काम- 1. ग्रहण काल के समय या उसके मध्य समय में भोजन ग्रहण करना, भोजन पकाना, शयन, मल-मूत्र त्याग, रतिक्रियाएं व सजने संवरने से संबन्धित कार्य नहीं करने चाहिए।

2. मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को सब्जी काटना, कपड़े सीना व पिरोना आदि से बचना चाहिए, नहीं तो जन्म लेने वाले बालक में शारीरिक दोष होने की संभावना रहती है।

3. ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए तथा ग्रहण दर्शन तो भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

4. ग्रहण के सूतक के नियमों का विचार गर्भवती महिलाओं, रोगी, बालकों और वृद्धों के लिए नहीं होता है।

ग्रहण काल की समाप्ति के बाद करें ये काम- शास्त्रों के अनुसार ग्रहण का मोक्षकाल समाप्त होने के बाद स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। ग्रहण काल में मंत्र जाप व चिंतन के कार्य करने का विधान है, इसलिये ग्रहण का मोक्ष काल समाप्त होते ही भगवान के दर्शन करना विशेष शुभ फलदायी होता है। ग्रहण समय में अगर कोई व्यक्ति तीर्थ यात्राओं पर है, तो उसे ग्रहण समाप्त होने के बाद करीब के तीर्थ स्थल पर जाकर स्नान अवश्य करना चाहिए।

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