बिहार-शराबबंदी : नीतीश कुमार ने कानून में ढील बरती

घर में शराबखोरी पकड़े जाने पर 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होती थी। अब इसमें ढील देते हुए कार्रवाई केवल उस शख्स के खिलाफ होगी जिसने शराब का सेवन किया होगा।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : एक समय बिहार में शराबबंदी और उसे लेकर सख्त कानून बनाने के अपने कदम को नीतीश ने खुद क्रांतिकारी जैसा ठहराया, लेकिन आज उनकी सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है। नीतीश सरकार ने बिहार में शराबबंदी को लेकर कानून में कई अहम बदलावों को कैबिनेट मंजूरी दे दी है। इन बदलावों के बाद एक समय वाकई में काफी सख्त दिखता यह कानून की धार आज पहले जैसी नहीं रह गई है। कभी शराब को लेकर काफी सख्ती दिखाने वाले नीतीश की इस नई नरमी के राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं।
की इस नरमी से एक तरफ जहां विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिला है, वहीं इन आरोपों पर भी मुहर लगती दिख रही है कि कानून को दुरुपयोग हो रहा था। बिहार विधानसभा के मॉनसून सत्र (20 जुलाई) में इस संशोधन बिल को पेश किया जाएगा।
पहले के कानून के मुताबिक पहली बार शराब पीते हुए पकड़े जाने पर गैरजमानती धाराएं लगती थीं। यानी जेल जाना तय होता था। 5 साल की सजा का प्रावधान था। अब इसे जमानती बना दिया गया है। अब 50,000 रुपये की फाइन या तीन महीने की जेल का प्रावधान किया गया है। धाराएं जमानती और असंज्ञेय होंगी। यानी जेल जाने से बचा जा सकेगा।
शराब का निर्माण, उसकी तस्करी और बिक्री करने पर 10 साल से उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था। पहली बार यह जुर्म करने वाले को पांच साल की सजा मिलेगी। दोहराने पर 10 साल की सजा का प्रावधान।
पहले शराब या शराब की खाली बोतलों की बरामदगी पर भी घर, वाहन और जमीन को सीज करने का प्रावधान था। अब शराब बरामदगी के बाद घर, वाहन और जमीन को जब्त नहीं किया जाएगा। हालांकि अगर तस्करी में इनका इस्तेमाल हो रहा है तो इन्हें जब्त किया जाएगा।
घर में शराबखोरी पकड़े जाने पर 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई होती थी। अब इसमें ढील देते हुए कार्रवाई केवल उस शख्स के खिलाफ होगी जिसने शराब का सेवन किया होगा।
पहले शराबबंदी का उल्लंघन करने पर सामूहिक जुर्माने का प्रावधान था। डीएम के पास अधिकार था कि किसी समूह, समुदाय या खास इलाके, गांव में शराबबंदी के उल्लंघन पर सामूहिक जुर्माना लगा सके। सामूहिक शराब के सेवन पर तो सख्ती है लेकिन किसी समूह, समुदाय, खास इलाके या गांव पर लगने वाले सामूहिक जुर्माने को प्रावधान को समाप्त करने की अनुशंसा की गई है।आपको बता दें कि विपक्ष नीतीश कुमार की शराबबंदी के फैसले के बाद से ही लगातार हमलावर बना रहा। विपक्ष के लगातार दबाव के बाद सीएम नीतीश कुमार ने भी स्वीकार किया था कि इस ऐक्ट के कुछ प्रावधानों का दुरुपयोग हुआ। तब उन्होंने इसमें संशोधन करने की बात कही थी, जिन्हें बुधवार को कैबिनेट ने मंजूर भी कर लिया।विपक्ष के नेताओं का आरोप था कि शराबबंदी की आड़ में दलितों और पिछड़ों को गिरफ्तार कर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से अबतक 1.5 लाख लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Facebook Auto Publish Powered By : XYZScripts.com