“हिन्दू मंदिरों” में ईसाई और मुस्लिमों को घुसने दिया जाए, ऐसा आदेश आने के बाद क्रुद्ध हुए संत..जनता भी आक्रोशित!!

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : उड़ीसा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को लेकर हिन्दू समाज आक्रोशित है। अब द्वारका पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य पूजयश्री निश्चलानंद सरस्वती जी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर हैरानी जताई है तथा कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का ये निर्णय उचित नहीं है तथा प्राचीन सनातनी सभ्यता पर आघात है।गौरतलब है कि हाल ही में सर्वोच्च न्यायलय ने निर्णय दिया है जगन्नाथ मंदिर में गैर हिन्दू धर्म के लोग भी प्रवेश कर सकते हैं। आपको बता दें कि हिन्दुओं के इस प्राचीन मंदिर की ये परंपरा रही है कि मंदिर में गैर हिन्दू को प्रवेश नहीं दिया जाता है।

पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती और गजपति राजा दिब्यसिंह देव ने श्री जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति देने के प्रस्ताव पर अपना विरोध दर्ज कराया है।ज्ञात हो कि राजा दिब्यसिंह देव को भगवान जगन्नाथ का पहला सेवक माना जाता है। 12 वीं सदी में निर्मित इस मंदिर में अभी सिर्फ हिंदुओं के प्रवेश की अनुमति है. मंदिर में गैर – हिंदुओं के प्रवेश पर चर्चा तब शुरू हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन को निर्देश दिया कि वह सभी दर्शनाभिलाषियों को भगवान की पूजा अर्चना करने दें, भले ही वे किसी भी धर्म के हों। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने विरोध जताते हुए कहा कि वह इस बाबत उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी ताकि न्यायालय अपने प्रस्ताव पर फिर से विचार करे।

गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने एक विज्ञप्ति में कहा कि सनातन धर्म की सदियों पुरानी परंपरा का उल्लंघन कर श्री मंदिर में सभी को प्रवेश की अनुमति देना हमें स्वीकार्य नहीं है। गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य श्री जगन्नाथ मंदिर में पंडितों की शीर्ष संस्था मुक्ति मंडप के प्रमुख होते हैं। शंकराचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना होगा क्योंकि जगन्नाथ अमंदिर का अपना महत्त्व है तथा स्थापना से अब तक मंदिर में गैर हिन्दुओं को प्रवेश नहीं दिया गया है तो अब भी नहीं दिया जा सकता है। पूज्य शंकराचार्य ने उम्मीद जताई है कि पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला बदला। 

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