सोनाली बेंद्र कैंसर का इलाज कराने न्यूयॉर्क पहुँची

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाली बेंद्र को कैंसर की ख़बर है। इसके बाद ही प्रशंसक सोनाली की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। सोनाली फिलहाल, न्यूयॉर्क में इस कैंसर का उपचार करा रही हैं। सोनाली ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में मेटास्टैटिक कैंसर होने का जिक्र किया। आइए जानते हैं कि कितना खतरनाक है ये कैंसर और क्या संभव है इसका इलाज।

मेटास्टैटिक कैंसर शरीर में होने वाले अन्य प्रकार के कैंसर की तुलना में ज्यादा खतरनाक माना जाता है, जिसकी वजह इसका शरीर के बाकी हिस्सों में फैल जाना है। मैटास्टैटिस का मतलब होता है रूप बदलना, यह कैंसर करीब करीब ऐसा ही करता है। कैंसर के सेल्स टूटने के बाद खून में मिलकर शरीर के बाकी हिस्सों में भी फैल जाते हैं। जिससे कि पूरे शरीर की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।इस कैंसर के लक्षणों में मुख्य रूप इस बात पर ज्यादा निर्भर करते हैं कि कैंसर शरीर के किस हिस्से तक फैल रहा है। जैसे अगर कैंसर की शुरुआत हड्डियों से होती है या हड्डियों में फैलता है तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिसके की दर्द रहने लगता है और फ्रैक्चर भी संभव है। इसके अलावा अगर कैंसर मस्तिष्क पर हमला करता है तो सिरदर्द, दौरे पड़ना या चक्कर आना के लक्षण दिखते हैं। इसी तरह जब कैंसर फेफड़ों की ओर बढ़ता है तो सांस लेने में दिक्कत आने लगती है। वहीं जब कैंसर यकृत (लीवर) तक पहुंचता है तो पेट में सूजन, दर्द और पीलिया लक्षण के रूप में उभरते हैं।इस कैंसर के लक्षणों में मुख्य रूप इस बात पर ज्यादा निर्भर करते हैं कि कैंसर शरीर के किस हिस्से तक फैल रहा है। जैसे अगर कैंसर की शुरुआत हड्डियों से होती है या हड्डियों में फैलता है तो हड्डियां कमजोर हो जाती हैं जिसके की दर्द रहने लगता है और फ्रैक्चर भी संभव है। इसके अलावा अगर कैंसर मस्तिष्क पर हमला करता है तो सिरदर्द, दौरे पड़ना या चक्कर आना के लक्षण दिखते हैं। इसी तरह जब कैंसर फेफड़ों की ओर बढ़ता है तो सांस लेने में दिक्कत आने लगती है। वहीं जब कैंसर यकृत (लीवर) तक पहुंचता है तो पेट में सूजन, दर्द और पीलिया लक्षण के रूप में उभरते हैं।चिकित्सकों की मानें तो पुरुषों के मुकाबले महिलाओँ में इस कैंसर का खतरा ज्यादा है। इसे रोकने और इलाज के लिए सबसे जरूरी है ये पता लगाना की कैंसर की शुरुआत कहां से हुई और कैसे आगे बढ़ रहा है। उस हिसाब से ही इसका इलाज तय होता है। दवाइयां, इंजेक्शन के अलावा कीमोथैरेपी, रेडिएशन थैरेपी और सर्जरी के जरिए इस पर काबू पाने की कोशिश की जाती है।

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