बेटी को ताइक्वांडो ट्रेनिंग दिलाते – दिलाते शिल्पी दास बन गई ताइक्वांडो चैम्पियन !!

इस मां का सपना था कि बेटी खिलाड़ी बने, नाम कमाए। लेकिन बेटी को खिलाड़ी बनाने के संघर्ष में वह कब खुद एक बेहतर खिलाड़ी व कोच बन गईं, उन्हें पता ही नहीं चला।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ) : कुछ कर गुजरने के लिए उम्र कोई खास मायने नहीं रखता। हौसले से आसमान छूना बेहद आसान है। 30 वर्षीय शिल्पी दास की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। इस मां का सपना था कि बेटी खिलाड़ी बने, नाम कमाए। लेकिन बेटी को खिलाड़ी बनाने के संघर्ष में वह कब खुद एक बेहतर खिलाड़ी व कोच बन गईं, उन्हें पता ही नहीं चला। आज मां व बेटी झोली भरकर पुरस्कार घर ला रही हैं। जमशेदपुर शहर में शिल्पी 200 से अधिक बच्चों को सेल्फ डिफेंस की कोचिंग दे रही हैं।नक्सल प्रभावित पूर्वी सिंहभूम जिले के खड़ंगाझाड़ की रहने वाली शिल्पी दास दो बच्चों की मां हैं। तीन साल तक खेल से उनका सिर्फ इतना नाता था कि वह बेटी को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग दिलाने के लिए टेल्को रिक्रिएशन क्लब ले जाया करती थीं। बात वर्ष 2015 की है। शिल्पी अपने 12 साल के बेटे शयन दास व पांच साल की बिटिया सृजिता को ताइक्वांडो की ट्रेनिंग के लिए टेल्को रिक्रिएशन क्लब लेकर गईं। यहां से उनके घर की दूरी तीन किलोमीटर है। सो, उन्हें बच्चों के लिए इंतजार करना पड़ता था। एक दिन उन्होंने डरते-डरते ही कोच सुनील कुमार प्रसाद पूछा- ‘क्या मैं ताइक्वांडो सीख सकती हूं। कोच ने उनका हौसला बढ़ाया। शिल्पी भी बच्चों के साथ ताइक्वांडो सीखने लगीं।आज अंतरराष्ट्रीय उड़ान भरने वाली यह गोल्डन मॉम कहती हैं कि शुरुआत में बच्चों के साथ सीखने में कुछ अटपटा जरूर लगा, लेकिन जल्द ही सबसे घुल मिल गई। कुछ महीने में ही मार्शल आर्ट की बारीकियों को आत्मसात कर लिया। देखते ही देखते शिल्पी दास ने इस खेल में कई अंतरराष्ट्रीय पदक अपने नाम कर लिए। गत वर्ष ब्लैक बेल्ट प्राप्त करने वाली शिल्पी दास ने ही कोलकाता में एशियाई ताइक्वांडो चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी जेएच तारापोर को भी प्रशिक्षित किया है। वह लौहनगरी के कई स्कूलों, विजया गार्डेन और हुडको में भी बच्चों को प्रशिक्षित कर रही हैं।खैर, मां-बेटी की इस शानदार जोड़ी की झोली में पदकों की भरमार है। जिस किसी प्रतियोगिता में दोनों जाती हैं, पुरस्कार लाना नहीं भूलतीं। सर्वप्रथम पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में शिल्पी ने एक स्वर्ण व एक रजत अपने नाम किया। वहीं, बेटी सृजिता ने तीन स्वर्ण पदक पर निशाना साधा। मालदा में शिल्पी दास ने दो स्वर्ण व एक कांस्य जीते, वहीं बेटी ने दो स्वर्ण पर कब्जा जमाया। इसी तरह आसनसोल में आयोजित प्रतियोगिता में मां-बेटी दो-दो स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। बैंकाक में हुई एशियाई चैंयिनशिप में शिल्पी ने कांस्य और उनकी बेटी सृजिता ने अंडर-9 वर्ग में स्वर्ण जीता था।पति जयंतो दास की खड़ंगाझाड़ बाजार में कपड़े की दुकान है। जयंतो ने शुरू में ना नुकुर की, लेकिन बाद में मान गए। कुछ माह सीखने के बाद ही मैं टूर्नामेंट में हिस्सा लेने लगी।

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