बुजुर्गों और बीमारों को सरकार ने आधार पर दी एक और राहत, बैंक खातों में आधार से छूट

यह संशोधन घायल होने, बीमार होने या उम्र की वजह से बायोमीट्रिक पहचान स्थापित करने में असमर्थ लोगों को अन्य तरीके से पहचान जाहिर करने की अनुमति देता है।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): बुजुर्गों तथा शारीरिक दिक्कतों की वजह से आधार कार्ड बनवाने में अक्षम लोग बैंक खाते के वेरिफिकेशन के लिए अब दूसरी आईडी भी दे सकते हैं। इन श्रेणी में आने वाले लोगों को बैंक खातों में आधार की अनिवार्यता से सरकार ने छूट दे दी है। गजट अधिसूचना में कहा गया है कि धनशोधन रोकथाम नियमों में संशोधन कर पहचान स्थापित करने के वैकल्पिक तरीकों को मंजूरी दे दी गई है। यह वैकल्पिक तरीकों की छूट उन लोगों को प्राप्त होगी जो अपनी बायोमीट्रिक पहचान स्थापित करने में परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यह संशोधन घायल होने, बीमार होने या उम्र की वजह से बायोमीट्रिक पहचान स्थापित करने में असमर्थ लोगों को अन्य तरीके से पहचान जाहिर करने की अनुमति देता है। इस संबंध में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय भूषण पांडे ने कहा कि इस नियम से बुजुर्ग, घायल और बीमार लोगों को मदद मिलेगी। सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के नियमों में संशोधन की जानकारी दी है। इसके तहत ऐसे लोग जिन्हें बायोमीट्रिक आइडेंटिफिकेशन में परेशानी हो रही हो वो अपनी पहचान के लिए दूसरे डॉक्यूमेंट्स दे सकते हैं। मंगलवार को कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह आधार लिंक नहीं होने की वजह से कुछ रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन लेने में मुश्किलें होने ने पर सफाई देते हुए कहा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को पेंशन लेने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है। उन्होंने साफ किया कि आधार एक अतिरिक्त सुविधा है जो लाइफ सर्टिफिकेट देने के लिए बैंक के चक्कर काटने की परेशानी से बचाता है। अदालत ने बैंक खातों और मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने की अनिवार्यता के लिए समयसीमा अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दी। इससे पहले सरकार की ओर से 31 मार्च 2018 की डेडलाइन तय की गई थी। आधार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया।

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