हिसार विमानन हब में इंडस्ट्री लगाने के लिए इजरायली एयरोस्पेस इंडस्ट्री को निमंत्रण

(एनएलएन मीडिया )   चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे हिसार विमानन हब में सहायक इकाइयों की स्थापना के लिए इज़राइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री (आईएआई) को आमंत्रित किया है। उन्होंने इजऱाइली विमानन उद्योग के तहत साइबर सुरक्षा कंपनियों के संघ को हरियाणा में अपना आधार स्थापित करने के लिए भी आमंत्रित किया है, जिसमें दुनिया की 200 शीर्ष कंपनियां हैं। मुख्यमंत्री ने आईएआई के अपने दौरे के दौरान यह निमंत्रण दिया, जहां उन्हें इजराइली अधिकारियों ने एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग के क्षेत्र में किए गए नवाचारों बारे जानकारी दी। चर्चा के दौरान, आईएआई के अधिकारियों ने विमानन केंद्र में गहरी दिलचस्पी दिखाई और अगले मास हिसार का दौरा करने की सहमति जताई। यहां यह उल्लेख करना उचित होगा कि आईएआई ने भारत सरकार के साथ एक बिलियन डॉलर का अनुबंध किया है जिसके तहत वह स्थानीय बाजार से 30 प्रतिशत सामग्री का निवेश या खरीद करने के लिए बाध्य है। अधिकारियों ने हरियाणा को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में देखने का आश्वासन दिया। जब आईएआई ने साइबर हमलों का मुकाबला करने और साइबर सुरक्षा में दक्षता की अपनी ताकत का व्याख्यान किया तो मुख्यमंत्री ने इजऱाइली विमानन उद्योग के तहत साइबर सुरक्षा कंपनियों के संघ को हरियाणा में आधार स्थापित करने को कहा। उन्होंने मानव रहित एरियल वाहन (यूएवी) और जेट्स के विनिर्माण संयंत्र का भी दौरा किया एवं विमान बनाने की प्रक्रिया में गहरी रूचि ली और प्रस्तावित हिसार विमानन हब में सहायक इकाइयों की स्थापना के लिए आईएआई को आमंत्रित किया।  श्री मनोहर लाल ने एफबीओ (फिक्स्ड-आधारित आप्रेशन) एमआरओ और विनिर्माण इकाइयों जैसे विमानन के विभिन्न अनुभागों को हरियाणा आने और भावी क्रांतिकारी परियोजना का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि एक ब्राउनफील्ड हवाईअड्डा होने के कारण हिसार को दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ-साथ प्रस्तावित औद्योगिक कोरिडोर की निकटता का लाभ प्राप्त है और यहां कम आर्द्र वातावरण है जो कि यूएवी और अन्य रक्षा सामग्री के लिए महत्वपूर्ण और आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अपनी रणनीतिक भौगोलिक अवस्थिति के कारण हिसार विमानन हब को कैसे इजऱाइली विमानन उद्योग के लिए विनिर्माण आधार बनाया जा सकता है, जहां से पूरे दक्षिण-पूर्वी बाजार की आवश्कताओं को पूरा किया जा सकेगा।

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