झारखंड : भारत को शिक्षा मानसिक गुलामी से देती है मुक्ति दिलाने की जरूरत : दत्तात्रेय

1947 में देश को आजादी तो मिली, लेकिन वर्तमान में अंग्रेजी राज के दौर से ज्यादा राष्ट्र विरोधी शक्तियां देश को तोड़ने का काम कर रही हैं।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि पिछले 12 सौ वर्षों से चले आक्रमणों के कारण सनातन प्रवाह की धारा क्षीण हुई।  ब्रिटिश हुकूमत में वह मृत प्राय: हो गयी।  दुर्भाग्य से राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद भी यही क्रम चलता रहा। निरंतर बढ़ती हुई औपनिवेशिक मानसिकता ने हमारी आत्म विस्मृति को अधिक गहरा बनाया।  इसके फलस्वरूप अकादमिक शिक्षा से लेकर सांस्कृतिक जीवन के सभी क्षेत्रों में हम औपनिवेशिकता के गुलाम हो गये।  भारत तेरे टुकड़े होंगे के संकल्प लिये जा रहे हैं।  सनातनता और निरंतरता को समाप्त करने के प्रयास हो रहे हैं।  ऐसे समय में भारत को वैचारिक व मानसिक गुलामी से मुक्ति दिलाना जरूरी है लोकमंथन इसी दिशा में शुरू हुआ एक प्रयास है।  श्री होसबोले मंगलवार को बेतार केंद्र में लोकमंथन के कार्यालय उद्घाटन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा यहां के लोक में निहित है।  यहां के लोगों ने संस्कृति व सभ्यता का बेमिसाल उदाहरण प्रस्तुत किया है।  ऐसे में लोकशक्ति को अक्षुण्ण बनाये रखने की जरूरत है।  भारत में एक बार फिर से मानवीय मूल्यों को स्थापित करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि भारत को फिर से विश्वगुरु बनाना है।  इसके लिए भारतीय संस्कृति, सभ्यता और भाषा को बढ़ावा देना जरूरी है।  हमारी संस्कृति और सभ्यता हजारों वर्ष पुरानी है।  1947 में देश को आजादी तो मिली, लेकिन वर्तमान में अंग्रेजी राज के दौर से ज्यादा राष्ट्र विरोधी शक्तियां देश को तोड़ने का काम कर रही हैं।  आज हमारी युवा पीढ़ी को साजिश के तहत भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे  विचारों को सिखाया-पढ़ाया जा रहा है।  विश्वविद्यालय में भारत विरोधी नारे लगाये जाते हैं।  ऐसे में भारतीय संस्कृति को तोड़ने वाली सक्रिय तत्वों को रोकने के लिए हमें अपनी संस्कृति और विचारों को विश्व स्तर पर सबों के बीच फैलाने की जरूरत है। भारतीय संस्कृति सर्व धर्म समभाव को बढ़ावा देने वाली संस्कृति है।  भारत को ऋषि-मुनियों,  संतों,  साहित्य व संस्कृति प्रेमियों ने बनाया है।  हमें अपनी सभ्यता और संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना है।  सितंबर में होनेवाले लोकमंथन कार्यक्रम में राज्य सरकार और यहां की  जनता सहयोग करेगी। श्री दास ने कहा कि समाज को शक्तिशाली बनाकर ही आगे बढ़ा जा सकता है।  झारखंड सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।  कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रवाह के अखिल भारतीय संयोजक जे नंदकुमार, प्रांत प्रचारक रविशंकर, अशोक भगत, ज्ञानू जालान, मयंक रंजन, राजीव कमल बिट्टू समेत कई लोग उपस्थित थे। जे नंदकुमार ने बताया कि राजधानी रांची में 27,28 व 29 सितंबर को लोकमंथन का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा।  खेलगांव में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में राष्ट्र को सर्वोपरि मानने वाले देशभर के एक हजार से अधिक विचारक कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। इसमें झारखंड के जनजातीय संस्कृति की झलक भी दिखेगी।  नंदकुमार मंगलवार को लोकमंथन के कार्यालय उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।  उन्होंने कहा कि हर दो वर्ष में लोकमंथन का आयोजन किया जाता है।  इससे पहले नवंबर 2016 में भोपाल में कार्यक्रम आयोजित हुआ था।  कार्यक्रम की सफलता को लेकर स्वागत समिति व आयोजन समिति का गठन किया गया है। स्वागत समिति में मुख्यमंत्री रघुवर दास गौरवाध्यक्ष होंगे।  वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत, मंत्री अमर बाउरी व मेयर आशा लकड़ा को संरक्षक मंडल में शामिल किया गया है।  स्वागत समिति के अध्यक्ष नंद कुमार इंदू, उपाध्यक्ष पद्मश्री अशोक भगत, एसएन ठाकुर, सचिव मनीष रंजन होंगे।  आयोजन समिति में अमर बाउरी को अध्यक्ष, जे नंदकुमार को सचिव, राजवी कमल बिट्टू को संयोजक, मयंक रंजन को सह संयोजक व रणविजय को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। 

 

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