CWG : कुल 66 पदकों के साथ भारत ने रचा इतिहास

भारतीय दल को यह मलाल जरूर हो सकता कि वे मैनचेस्टर में साल 2002 में अपने सर्वकालिक दूसरे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन मतलब 69 पदकों की बराबरी नहीं कर सके

(एनएलएन मीडिया) : ऑस्ट्रेलिया में 21वें कॉमनवेल्थ खेलों के आखिरी 10वें दिन भारत ने 66 पदकों के साथ बहुत ही शानदार अंदाज में अपने अभियान का समापन किया।यह कुल मिलाकर भारत का खेलों के इतिहास में तीसरा सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। करोड़ों हिंदुस्तानी खेलप्रेमियों की नजरें इसी बात पर लगी थीं कि क्या भारत साल 2014 में ग्लास्गो के प्रदर्शन को पीछे छोड़ पाएगा या नहीं। भारतीय दल ने इन उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतरते हुए ग्लास्गो के 64 पदकों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया, लेकिन इसके साथ भारतीय खिलाड़ियों को थोड़ा यह मलाल भी जरूर होगा कि वे मैनचेस्टर (साल 2002, 69 पदक) से कुछ ही पीछे रह गए। इससे पहले भारत ने साल 2010 में दिल्ली में हुए खेलों में 101 और साल 2002 में मैनचेस्टर में 69 पदक जीते थे। गोल्ड कोस्ट में भारत का आखिरी पदक बैडमिंटन में पुरुष डबल्स मुकाबलों के फाइनल में हुई हार के साथ रजत पदक के रूप में आया।

सायना नेहवाल ने महिला सिंगल्स में हमवतन और रियो ओलंपिक की रजत पदक विजेता पी।वी सिंधु को हराकर अंतिम दिन रविवार को महिला एकल वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। सायना ऐसे में राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बन गई हैं। सिंधु को हार के कारण रजत पदक से संतोष करना पड़ा। लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता सायना ने सिंधु को 56 मिनट तक चले इस मैच में 21-18, 23-21 से मात देकर राष्ट्रमल खेलों का दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

वहीं पुरुष वर्ग में वर्ल्ड नम्बर-1 भारतीय खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत उलटफेर का शिकार हो गए और स्वर्ण पदक से चूक गए। श्रीकांत को मलेशिया के दिग्गज ली चोंग वेई ने एक घंटे पांच मिनट में 19-21, 21-14, 21-14 से मात देकर जीत हासिल की।

टेबल टेनिस
अचंत शरत कमल ने पुरुषों की एकल वर्ग स्पर्धा का कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। शरत ने कांस्य पदक के लिए खेले गए इस मैच में इंग्लैंड के सैमुएल वॉकर को मात दी। शरथ ने सैमुएल को 4-1 (11-7, 11-9, 9-11, 11-6, 12-10) से हराकर इस मैच को जीता और आखिरकार कांस्य पदक जीतने में सफल रहे।

वहीं मिक्स्ड डबल्स में मनिका बत्रा और साथियान गणाशेखरन ने कांस्य पदक अपने नाम किया। मनिका-साथियान की जोड़ी ने हमवतन शरथ-मौमा को एकतरफा मुकाबले में 3-0 (11-6, 11-2,11-4) से हराकर इन खेलों का पहला कांस्य पदक हासिल किया।

 

कुल मिलाकर भारतीय खिलाड़ियों ने इतिहास रचते हुए गोल्ड कोस्ट में एक बार फिर से यह साबित किया कि खेलों की दुनिया में भारतीय ताकत लगातार पढ़ रही। और यह बढ़े हुए स्वर्ण पदकों की संख्या में देखी जा सकती है। लेकिन ये खिलाड़ी थोड़े निराश होंगे कि कुछ ही पदकों से भारत मैनचेस्टर के 69 पदकों से सिर्फ कुछ ही दूर रह गया।

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