नक्सली हमले में खाईं थी गोलियां,पॉलिथिन में आंत रखकर जीने को मजबूर ये जवान शहर में एक सिपाही मौत से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर है। इलाज न मिलने की वजह से वो अपनी नकली आंत लपेटकर जिंदगी काट रहा है।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ): शहर में एक सिपाही मौत से भी बदतर जिंदगी जीने को मजबूर है। इलाज न मिलने की वजह से वो अपनी नकली आंत लपेटकर जिंदगी काट रहा है। ऐसा भी नहीं इस समस्या का इलाज नहीं लेकिन रूपए की कमी के चलते उसे इलाज कराना संभव नहीं हो पा रहा है। इतना ही नहीं इस सिपाही की एक आंख गोली लगने की वजह से खराब हो गई थी।

– दरअसल, मध्यप्रदेश के तरसमा के रहने वाले सीआरपीएफ जवान मनोज तोमर 2014 में छत्तीसगढ़ की नक्सली मुठभेड़ में घायल हो गए थे। उनके पेट में सात गोलियां लगी थी।

– इतनी गोलियां लगने के बाद भी उनकी जान बच गई थी, लेकिन इलाज न मिलने की वजह से मनोज के पेट से बाहर निकली आंत पॉलीथिन में रखकर अपनी जिंदगी बिता रहे हैं।
– बता दें, मनोज लगातार, आठ साल तक पीएम मनमोहन सिंह के सुरक्षा दल में रह चुके हैं। मनोज को केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से 5 लाख रूपए की मदद देने का भी वादा किया गया है। लेकिन अब उस राशि का कहीं कुछ पता नहीं है। उनके आंख भी ठीक हो सकती है लेकिन उसमें भी रूपए की मजबूरी सामने आई है।
– सीआरपीएफ के नियम के मुताबिक, अनुबंधित अस्पताल में इलाज कराया जा सकता है। लेकिन अगर सीआरपीएफ जवान अपने स्तर पर दूसरे अस्पताल में जाएगा तो उसका खर्चा सरकार नहीं उठाएगी। यह खर्चा उसे खुद उठाना पढ़ेगा।

– मनोज 11 मार्च 2014 को छत्तीसगढ के सुकमा जिले के दोरनापाल में पोस्टेड थे। तभी वह नक्सली हमले में घायल हो गए। इस दौरान उनकी टीम के 11 जवान शहीद हुए थे। इस हमले में सिर्फ मनोज जिंदा बचकर लौटे थे।

रूपए की कमी की वजह से नहीं हो पा रहा इलाज…

मनोज बताते हैं, कि सीआरपीएफ रायपुर में इलाज करा रहे है। गंभीर घायल होने की वजह से आंत को पेट में रखने का ऑपरेशन उस समय संभव नहीं था। इसलिए आंत का कुछ हिस्सा बाहर ही रह गया। डॉक्टरों की सलाह पर वे दिल्ली के एम्स भी गए लेकिन ओपीडी से आगे किसी डॉक्टर को नहीं दिखा पाए। आंख का अच्छा इलाज चेन्नई के एक अस्पताल में हो सकता है। उसके लिए रूपए की जरूरत थी।
– मनोज के मुताबिक, उनकी शिकायत सीआरपीएफ से नहीं बल्कि सरकार से हैं। नियम कहता है कि वे छत्तीसगढ़ में ड्यूटी के दौरान जख्मी थे। इसलिए उनका उपचार अनुबंधित रायपुर के नारायणा अस्पताल में ही होगा। सिर्फ सरकार ही एम्स में आंत के ऑपरेशन और चेन्नई में आंख के ऑपरेशन करवा सकती है, जो नहीं हो रहा है।

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