भारत में होने वाले वन-डे और टी 20 मैच अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच एसजी की गेंदों से आयोजित किए जाता है।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) सब कुछ ठीक रहा तो भारतीय जमीन पर टीम इंडिया के होने वाले सीमित ओवर क्रिकेट के मैच कूकाबुरा की बजाय एसजी गेंद से होंगे। घरेलू कोच और कप्तानों की मुंबई में हुई वार्षिक बैठक में इस बारे में चर्चा की गई है। इस दौरान अन्य कई मुद्दों पर भी बातचीत हुई जिसमें अम्पायरिंग के खराब स्तर पर बातचीत हुई।
भारत में होने वाले प्रथम श्रेणी मैच और अंतरराष्ट्रीय टेस्ट मैच एसजी की गेंद से आयोजित होते हैं जबकि सीमित ओवर क्रिकेट में कूकाबुरा की गेंद उपयोग में ली जाती है। बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट में एसजी गेंदों का इस्तेमाल पहले से प्रयोग के तौर पर किया है। मुश्ताक अली ट्रॉफी में सफेद गेंद का फीडबैक ठीक नहीं था लेकिन विजय हजारे ट्रॉफी में खिलाड़ी इससे खुश थे। राज्य टीम से जुड़े एक वरिष्ठ कोच के अनुसार क्रिकेट ऑपरेशंस के जनरल मैनेजर सबा करीम से इस बारे में चर्चा हुई है इसलिए भविष्य में भारत में एसजी की सफेद गेंद इस्तेमाल की जा सकती है। इस बार घरेलू सत्र में हुई अम्पायरिंग को लेकर कई कोच और कप्तानों ने शिकायत की और बताया कि कैसे बहुत बार विवादास्पद निर्णय दिए गए। कुछ लोग डीआरएस के पक्ष में थे लेकिन बाद में इस पर चर्चा नहीं की गई।पीटीआई से बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आईसीसी के एलिट पैनल में भारत से सिर्फ सुन्दरम रवि है इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि अम्पायरिंग का स्तर कैसा है।
उल्लेखनीय है कि एसजी की गेंद पर सीम ऊभरी हुई रहती है, जबकि कूकाबुरा में ऐसा नहीं होता। इसके अलावा कूकाबुरा की गेंद मशीन से तैयार होती है जबकि एसजी की गेंद हाथ से बनाई जाती है। एक और अंतर इन दोनों गेंदों में यह भी है कि एसजी की सभी गेंदों की साइज अलग होती है जबकि कूकाबुरा में सब गेंदों का आकार एक जैसा होता है।

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