मेघालय चुनाव: बीजेपी ने NPP से साधा संपर्क।

गोवा और मणिपुर से सबक, शिलॉन्ग में अहमद पटेल।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) शिलॉन्ग: मेघालय विधानसभा चुनाव के नतीजे जैसे-जैसे साफ हो रहे हैं, वहां सियासी हलचल बढ़ती जा रही है। अब तक मिले रुझानों/नतीजों से कांग्रेस, बीजेपी और एनपीपी के बीच वहां कड़ी टक्कर है और किसी भी एक दल को बहुमत मिलना मुश्किल दिख रहा है। ऐसे में अभी से ही वहां सियासी उठापटक का खेल शुरू हो गया है। अभी तक के रुझानों/नतीजों में कांग्रेस यहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है लेकिन अभी उसके पास इतने भी आंकड़े नहीं हैं कि अकेले सरकार बना ले। उधर, अपनी पुरानी गलतियों (गोवा और मणिपुर विधानसभा चुनाव) से सबक लेते हुए कांग्रेस ने मेघायल में सत्ता बचाने की तैयारी शुरू कर दी है। रुझानों के साथ ही कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल और कमलनाथ को मेघालय भेजा गया है। दरअसल, गोवा और मणिपुर में भी नतीजों में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद लेटलतीफी के कारण कांग्रेस सरकार बनाने में विफल रही थी। यही वजह है कि कांग्रेस इस बार मेघायलय में अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। रुझानों के सामने आने के साथ ही कांग्रेस प्रमुख रणनीतिकार और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल के साथ कमलनाथ को भेजकर वहां किला बचाने में जुट गई है। उधर, मेघालय में पहली बार ‘कमल’ खिलाने की कोशिश कर रही बीजेपी भी दबे पांव चाल चल रही है। बताया जा रहा है कि बीजेपी मेघालय में दिवंगत पीए संगमा की पार्टी नैशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) से बातचीत कर रही है। चर्चा है कि नतीजे साफ होने के बाद बीजेपी और एनपीपी हाथ मिला सकती हैं। इस सबके बीच पिछले 9 सालों से सत्ता में काबिज मुख्यमंत्री मुकुल संगमा को पूरा भरोसा है कि उनकी पार्टी फिर से सत्ता में आएगी। मुकुल संगमा के आत्मविश्वास को छोड़ दें तो वर्ष 2016 में हुए तूरा लोकसभा उपचुनाव में एनपीपी ने उन्हें तगड़ा झटका दिया था। तूरा लोकसभा सीट के उपचुनाव में पीए संगमा के बेटे कोनार्ड ने सीएम मुकुल संगमा की पत्नी को बड़े अंतर से हरा दिया था।सियासी पंडितों का भी मानना है कि मेघालय में कांग्रेस के सामने किला बचाने की चुनौती है। अगर मेघालय में कांग्रेस हार गई तो पूरे देश में संदेश जाएगा कि एक और राज्य से पार्टी समाप्त हो गई और बीजेपी कांग्रेस मुक्त भारत के अपने नारे को और मजबूती से पेश करेगी। ऐसे में 2019 से पहले अपनी संभावनाओं को खुला रखने के लिए कांग्रेस पर इस राज्य में बेहतर प्रदर्शन करने का दबाव है। कांग्रेस को यहां बागी गुट के अलावा तमाम छोटे-छोटे दलों से चुनौती मिल रही है, जिनके साथ बीजेपी चुनाव बाद सरकार बनाने की जुगत में है। बता दें मेघालय में विधानसभा की कुल 60 सीटें हैं और 27 फरवरी को 59 सीटों पर वोटिंग हुई थी। एक सीट पर बाद में मतदान होना है। किसी भी दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए 31 सीटों पर जीत जरूरी है।

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