इशरत जहां एनकाउंटर केस में फंसे गुजरात के पूर्व DGP पीपी पांडेय CBI कोर्ट से बरी

कोर्ट ने कहा कि किसी भी गवाह ने पांडेय को अपहरण और हत्या का आरोपी नहीं ठहराया है. कोर्ट ने ये भी कहा कि गवाहों के साक्ष्य विरोधाभासी थे क्योंकि अलग-अलग जांच एजेंसियों को अलग-अलग सबूत दिए गए।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) : सीबीआई की विशेष अदालत ने बुधवार को इशरत जहां मामले में गुजरात के पूर्व प्रभारी डीजीपी पीपी पांडेय पर अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि साल 2004 इशरत जहां और तीन अन्य लोगों के फर्जी एनकाउंटर मामले में पांडेय आरोपी नहीं होंगे।सीबीआई स्पेशल कोर्ट के जज जेके पांड्या ने पांडेय के डिस्चार्ज एप्लीकेशन को मंजूरी दी कि उनके खिलाफ चारों के अपहरण और हत्या से जुड़ा कोई सबूत नहीं है. इस केस की जांच करने वाली सीबीआई ने इस केस में पांडेय पर आरोप लगाया था कि वो कथित फर्जी एनकाउंटर में शामिल थे. पांडेय उस समय अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के प्रमुख थे। कोर्ट ने कहा कि किसी भी गवाह ने पांडेय को अपहरण और हत्या का आरोपी नहीं ठहराया है। कोर्ट ने ये भी कहा कि गवाहों के साक्ष्य विरोधाभासी थे क्योंकि अलग-अलग जांच एजेंसियों को अलग-अलग सबूत दिए गए। कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद सीआरपीसी की धारा 197 के तहत पांडेय पर चार्जशीट दायर करने से पहले जांच अधिकारी ने सरकार से उन पर मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं ली। बता दें साल 2013 में सीबीआई द्वारा पहली बार दायर की गई चार्जशीट में गुजरात के सात पुलिस अधिकारियों को आरोपी ठहराया गया था. इनमें आईपीएस ऑफिसर पीपी पांडेय, डीजी वंजारा और जीएल सिंघल को इशरत जहां एनकाउंटर मामले में अपहरण, हत्या और साजिश करने का आरोपी ठहराया गया था।

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