राज्यसभा में पीएम का रामायण बयान, रेणुका बोलीं- बहुत निंदनीय।

रामायण सीरियल के बाद ऐसी हंसी सुनने का सौभाग्य आज जाकर मिला है।



(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) नई दिल्ली: राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी का कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी पर रामायण वाले बयान ने सियासी गर्मी को और बढ़ा दिया है। रेणुका पीएम के इस बयान से भड़क गईं और इसे निंदनीय बता डाला। पीएम मोदी ने बुधवार को संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। पीएम के भाषण के दौरान दोनों ही सदनों में कांग्रेस सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की। जब पीएम राज्यसभा में अपनी बात रख रहे थे तब भी कांग्रेस नेता हंगामा करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान एक ऐसी घटना हुई जिसकी वजह से राज्यसभा में हंसी के ठहाके लगने लगे। दरअसल, राज्यसभा में जब पीएम मोदी भाषण दे रहे थे तब कांग्रेस की सीनियर नेता रेणुका चौधरी जोर-जोर से हंस रही थीं। रेणुका की इस हंसी से पीएम के भाषण में रुकावट आ रही थी। इसपर मोदी ने वेंकैया नायडू से कहा, ‘सभापति जी मेरी आपसे विनती है रेणुकाजी को कुछ मत कहिए (चुप होने के लिए मत कहिए), रामायण सीरियल के बाद ऐसी हंसी सुनने का सौभाग्य आज जाकर मिला है।’ पीएम की इस बात को सुनकर बीजेपी और सहयोगी दलों के सभी सदस्य जोर-जोर से हंसने लगे और रेणुका चौधरी की हंसी बंद हो गई। इस तीखी टिप्पणी के बाद रेणुका कुछ कहती दिखाई दीं, लेकिन उनकी आवाज ठहाकों में सुनाई नहीं दी। हालांकि रेणुका सदन में तो इस बयान पर कुछ नहीं बोल पाईं, लेकिन जब वह सदन के बाहर निकलीं तो पीएम पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘पीएम ने निजी हमला बोला है, वैसे भी आप उनसे और क्या उम्मीद कर सकते हैं। मैं इसका उत्तर देकर उतना गिरना नहीं चाहती हूं। किसी महिला के खिलाफ इस तरह का बयान निंदनीय है।’ उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा था कि उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने वाला और घोटालों वाला भारत दिया था। बता दें कि इससे पहले लोकसभा में आंध्रप्रदेश को स्पेशल कोटा देने वाले मुद्दे को लेकर कांग्रेस हंगामा करती रही थी। मोदी ने उसपर बयान दिया था। लोकसभा में पीएम ने मल्लिकार्जुन खड़गे के उस बयान का भी जवाब दिया जिसमें उन्होंने कथित रूप से कहा था कि भारत में लोकतंत्र नेहरू की देन है। मोदी ने कहा कि भारत में लोकतंत्र आजादी से भी कहीं पहले से था। इसके लिए उन्होंने 12वीं सदी का उदाहरण दिया था।

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