चीन से आ रही मशीनों से हो सकती है देश की जासूसी : आईटी राज्य मंत्री के. जे. अलफोंस ने जताई चिंता



(न्यूज़ लाइव नाऊ) : चीन से भारत में आने वाले मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स लोगों की जासूसी का जरिया हो सकते हैं. ये आशंका पहले भी कई बार जताई गई है. लेकिन अब मोदी सरकार के एक मंत्री ने भी इस विषय में फिक्र जताई है. सूचना और प्रौद्योगिकी (IT) राज्य मंत्री के जे अल्फोंस ने कहा है कि जिन देशों से हमारे संबंध अधिक दोस्ताना नहीं, वहां से बड़े पैमाने पर मशीनों, गैजेट्स का आयात खतरे से खाली नहीं है, इससे जासूसी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

अल्फोंस ने आगाह किया कि आयात किए जाने वाले सामान की सिर्फ कम कीमतों को देखना ही सही नहीं है. अल्फोंस के मुताबिक आमतौर पर सरकारी खरीद इस बात के आधार पर होती है कि सबसे कम कीमत में सामान कहां से मिल रहा है लेकिन खतरे को देखते हुए इस नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है.



शुक्रवार को दिल्ली में ‘साइबर सुरक्षित भारत’ कॉन्फ्रेंस में आईटी मंत्री अल्फोंस ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मशीनों से जासूसी के बारे में व्यक्तिगत तौर पर उन्हें डर लगता है. हालांकि अल्फोंस ने सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया लेकिन साफ कर दिया कि वो किस देश के बारे में बात कर रहे हैं. अल्फोंस ने कहा, ‘आप सभी समझ सकते हैं कि बात किस के बारे में हो रही है मुझे उस देश का नाम लेने की जरूरत नहीं है.’

अल्फोंस ने कहा कि ऐसी मशीनों को दूर से ही कंट्रोल किया जा सकता है और एक स्विच के जरिए इसे कभी भी बंद किया जा सकता है और इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.

IT राज्य मंत्री ने कहा कि सरकारी खरीद में कीमत पर ही सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है लेकिन खतरा देश की सुरक्षा से जुड़ा हो तो इसके बारे में पुनर्विचार करने की जरूरत है. अल्फोंस ने कहा कि अब ऐसी मशीनें आ गई हैं जिससे किसी की भी जासूसी बहुत आसान हो गई है, इस्तेमाल करने वालों को उसके बारे में पता तक नहीं चलता.

गौरतलब है कि यूपीए की सरकार के समय भी चीन से महत्वपूर्ण मशीनों पर आयात को लेकर एक बार सवाल उठा था और खुफिया एजेंसी की तरफ से यह मांग हुई थी कि चीन की कुछ कंपनियों के सामान को देश में आयात नहीं किया जाए. लेकिन बाद में इस प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.




अल्फोंस ने कहा कि बार-बार लोग आधार के डेटा को लेकर सवाल उठाते हैं और यह कहते हैं कि इससे लोगों की गोपनीयता भंग हो रही है. लेकिन असलियत यह है कि आधार में किसी के बारे में जितनी जानकारी ली जाती है, उससे बहुत ज्यादा जानकारी कहीं और तरीके से पहले से ही उपलब्ध होती है.

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