जैस्मीन : ऐश्वर्या राय निभा सकती हैं सरोगेट मदर का किरदार

मुंबई। सरोगेसी यानि किराए की कोख! बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ की रियल लाइफ़ में अक्सर सुने जाने वाले इस शब्द की गूंज अब बड़े पर्दे पर भी सुनायी देने वाली है। सरोगेसी की कहानी पर आधारित एक फ़िल्म जैस्मीन आने वाली है, जिसका फ़र्स्ट लुक निर्माताओं ने जारी किया है।

पोस्टर काफ़ी प्रभावशाली है, जिस पर प्रेग्नेंट महिला का पेट दिखाया गया है। दो हाथ पेट के फूले हुए हिस्से को चारों ओर से घेरे हुए हैं, जिससे हाथों के ज़रिए प्रेम आकृति बन गयी है। नाभि के पास लिखा है- सोल्ड यानि बिक्रित। जैस्मीन शीर्षक के साथ जो टैगलाइन दी गयी है, उसमें लिखा है- स्टोरी ऑफ़ ए लीज़्ड वूम्ब यानि एक किराए की कोख की कथा, जिससे फ़िल्म का विषय साफ़ हो जाता है।

इस फ़िल्म को श्रीनारायण सिंह और प्रेरणा अरोड़ा प्रोड्यूस कर रहे हैं, जिन्होंने अक्षय कुमार के साथ ‘टॉयलेट- एक प्रेम कथा’ का निर्माण किया था। फ़िल्म में जैस्मीन का चरित्र कौन निभा रहा है, इसको लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, मगर माना जा रहा है कि ऐश्वर्या इस किरदार को निभा सकती हैं। सरोगेसी एक भावनात्मक विषय भी है।

अपनी कोख किराए पर देने वाली मां का बच्चे से लगाव हो जाना बेहद सामान्य सी बात है। अगर ऐसा हो जाए, तो परिस्थितियां कितनी जटिल हो सकती हैं। यही जैस्मीन की कहानी है। बताया जाता है कि फ़िल्म रियल लाइफ़ में हुई एक घटना से प्रेरित है जो गुजरात में हुई थी। फ़िल्म को सिद्धार्थ और गरिमा निर्देशित कर रहे हैं, जिन्होंने टॉयलेट एक प्रेम कथा लिखी थी।

बहरहाल, सरोगेसी एक ऐसा विषय है, जिसे बड़े पर्दे पर अधिक इस्तेमाल नहीं किया गया है। बहुत कम फ़िल्मों की कहानी इस बेहद अहम सामाजिक विषय को केंद्र में रखकर लिखी गयी है। हिंदी सिनेमा के पर्दे पर सरोगेसी को लाने का श्रेय निर्देशक लेख टंडन को दिया जा सकता है, जिन्होंने 1983 में दूसरी दुल्हन शीर्षक से फ़िल्म बनायी। इस फ़िल्म की कहानी एक नि:संतान दंपत्ति के इर्द-गिर्द घूमती है।

इन  किरदारों में बंगाली एक्टर विक्टर बैनर्जी और शर्मिला टैगोर थीं, जबकि शबाना आज़मी ने एक वेश्या का रोल निभाया था, जो उनके लिए गर्भ धारण करती है। ये फ़िल्म 1970 में आयी अमेरिकन फ़िल्म द बेबी मेकर से प्रेरित थी, जिसमें एक हिप्पी लड़की नि:संतान दंपत्तियों के लिए किराए की कोख देने का साधन बन जाती है। अपने वक़्त से दशकों आगे की ये फ़िल्म व्यवसायिक नज़रिए से फेल रही।

 

सलमान ख़ान को लंबी रेस के लिए भले ही आज टाइगर ज़िंदा है जैसी फ़िल्में करने की सलाह दी जाती हो, मगर वो ऐसे एक्टर हैं, जिन्होंने अपने करियर के शीर्ष पर कुछ चुनौती भरे विषय भी चुने हैं। सरोगेसी उनमें से एक है। 2001 में आयी चोरी-चोरी चुपके-चुपके का ट्रीटमेंट भले ही मसालेदार हो, मगर कहानी कहना आसान नहीं था। ये फ़िल्म दूसरी दुल्हन का ही रीमेक कही जा सकती है, जिसमें सलमान और रानी नि:संतान दंपत्ति के किरदार में थे तो प्रीति ज़िंटा प्रोस्टिट्यूट वाले रोल में नज़र आयीं।

सरोगेसी पर अगली फ़िल्म  फ़िलहाल 2002 में आयी, जिसे मेघना गुलज़ार ने डायरेक्ट किया था। फ़िल्म में तब्बू को संतान देने के लिए उनकी दोस्त बनी सुष्मिता सेन अपनी कोख देती हैं। हाल ही में टीवी शो दिल से दिल तक में सरोगेसी पर आधारित कहानी दिखायी गयी, जो चोरी-चोरी चुपके-चुपके से प्रेरित थी।

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