शिव नाम बुरे भाव, विचार व इच्छाओं का करे अंत

हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक त्रिदेवों में ब्रह्मदेव सृष्टि, विष्णु पालन तो शिव संहारक शक्ति के रूप में पूजनीय है। हालांकि त्रिदेव एक ही ईश्वर की तीन शक्तियां और कल्याणकारी स्वरूप माने जाते हैं। खासतौर पर शिव नाम का अर्थ और भाव ही कल्याण, शुभ और मंगल से हैं। जिसमें संकेत साफ है कि शिव नाम या भक्ति मन, वचन और कर्म में शुभ को स्थान देकर अशुभ से दूर ले जाते हैं। शास्त्र कहते हैं कि शिव नाम बुरे भाव, विचार व इच्छाओं का अंत कर प्राणी को जगत के कल्याण का कारण बनाता है।



शिव का तमोगुणी संहारक रूप भी असल में तामसी, पापी या बुरी शक्तियों का अंत कर कर धर्म व सद्गुणों का रक्षक है, जो जगत के लिए कल्याणकारी ही है। इसलिए वह शिव व शंकर यानी निराकार व साकार दोनों ही रूपों में वंदनीय है। सांसारिक जीवन में भी अनेक अवसरों पर इच्छा या स्वार्थ के वशीभूत होने से हर इंसान के मन या विचारों में पैदा हुए दोष छोटी या बड़ी परेशानियों का कारण बनते हैं। शास्त्रों में बताए कुछ शिव मंत्र मन को पावनता से जोड़ सारी दिक्कतों का जल्द अंत करने वाले माने गए हैं।खासतौर पर सोमवार या विशेष शिव तिथि पर यहां बताए जा रहे शिव मंत्र का स्मरण पाप व संकटनाशक माना गया है। सोमवार को शिव की सफेद चंदन, अक्षत, बिल्वपत्र, सफेद फूल के साथ दूध से बनी सफेद रंग की मिठाईयों का भोग लगाएं। धूप व दीप लगाकर नीचे लिखा शिव मंत्र बोलें व शिव की आरती कर कष्ट व संकटमुक्ति की कामना करें –



नमो रुद्राय महते सर्वेशाय हितैषिणे।

नन्दीसंस्थाय देवाय विद्याभकराय च।।

पापान्तकाय भर्गाय नमोनन्ताय वेधसे।

नमो मायाहरेशाय नमस्ते लोकशंकर।।

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