हमारे देश में यौन शोषण केस में पीडि़त को ही शर्मिंदा होने की परंपरा है: र‍िचा चड्ढा

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हॉलीवुड के फिल्म प्रोड्यूसर हार्वी विंस्टीन के खिलाफ लगे कास्ट‍िंग काउच और यौन उत्पीड़न का मामला पिछले दिनों काफी चर्चा में रहा. इस प्रोड्यूसर के खिलाफ 51 एक्ट्रसेस ने आरोप लगाए थे. इसके साथ ही यह बहस भी तेज हो गई कि बॉलीवुड में यौन शोषण और कास्ट‍िंग काउच के मामले में कौन उठाएगा?




इस मामले में रिचा चड्ढा ने कहा, ये बॉलीवुड में बहुत जल्द नहीं होने वाला, क्योंकि हमारे देश में पीडि़त के ही शर्मिंदा होने की परंपरा है. लेकिन जब भी ये होगा, जैसा कि हॉलीवुड में हुआ, तब पूरा पॉवर स्ट्रक्चर चेंज हो जाएगा. जो लोग खुद को प्रोग्रेसिव बताते हैं और फेमिनिस्ट फिल्में बनाते हैं उनकी हकीकत सामने आ जाएगी.

यदि किसी को लगता है कि वो जज्बाती तौर पर टूटने के अलावा अपनी रोजीरोटी भी खो देगा तो वो सामने क्यों आएगा. वे लोगों पर पैसे से हमला नहीं कर सकते, इसलिए अपनी विरासत से करेंगे. मुझे लगता है कि ये चार-पांच साल बाद जरूर होगा. दीया मिर्जा ने इस मामले में कहा था कि उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के लिए किसी को मक्खन नहीं नहीं लगाया, इसलिए लोगों ने उन्हें बोरिंग कह दिया.


हार्वी विंस्टीन पर मीडिया फैसला सुना रही है, लेकिन पहले उनके बारे में सोचना चाहिए, जो इस तरह के लोगों को अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने देने हैं. मुझे लगता है कि इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता कि कोई पुरुष अपनी ताकत का इस्तेमाल औरत या किसी पुरुष के यौन उत्पीड़न के लिए करे.”

बता दें कि डेढ़ माह पहले सोशल साइट पर वर्ल्ड वाइड #MeToo कैंपेन चर्चा में आया था. एक के बाद एक महिलाएं यौन उत्पीड़न की घटनाएं शेयर कर रही थीं. इसकी शुरुआत तब हुई थी जब हॉलीवुड के मूवी मुगल हार्वी वीनस्टीन पर दर्जनों महिलाओं ने रेप और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. एक और महिला ने कहा था कि विंस्टीन ने उनके साथ हैवानियत की. मिमी हलेयी नाम की महिला ने कहा था कि 2006 में हार्वी वीनस्टीन ने उनका रेप किया. तब उनके पीरियड्स के दिन थे.

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