शाह बोले: सिब्बल अयोध्या केस में क्यों देरी चाहते हैं?

नई दिल्ली. कपिल सिब्बल ने वक्फ बोर्ड के वकील के तौर पर सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि अयोध्या विवाद की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद की जाए। इस पर बीजेपी प्रेसिडेंट अमित शाह ने मंगलवार को कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, ”कांग्रेस को इस मुद्दे पर अपना रुख साफ करना चाहिए। राहुल गांधी गुजरात चुनाव से पहले मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं, दूसरी तरफ कांग्रेस नेता सिब्बल राम जन्मभूमि केस में देरी चाहते हैं। राहुल को इस मुद्दे पर अपनी बात रखें।”




कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी सुप्रीम कोर्ट के जरिए फैसला चाहती है, लेकिन बीजेपी ‘मंथरा’ का भूमिका निभा रही है। बता दें कि गुजरात में कैंपेन के दौरान राहुल गांधी करीब 22 बार अलग-अलग मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं। अमित शाह ने कहा, ”आज एक हैरान करने वाली दलील कांग्रेस के नेता और वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट ने रखी। उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा इलेक्शन पूरे होने तक राम जन्मभूमि विवाद की सुनवाई ठाल देनी चाहिए।”



राम मंदिर निर्माण अपना रुख साफ करें राहुल गांधी: अमित शाह

”जब भी कांग्रेस किसी बात में अगल स्टैंड लेना चाहती है तो सिब्बल को आगे करती है। पहले 2जी, गुजरात आरक्षण और अब अयोध्या विवाद में सिब्बल वकील के तौर पर सामने आए हैं। मैं चाहता हूं कि कांग्रेस राम जन्मभूमि केस की सुनवाई जल्द चाहती है या नहीं? इस पर अपना रुख साफ करे। या राहुल और कांग्रेस भी चाहती है कि अगले लोकसभा इलेक्शन तक केस की सुनवाई ना हो? अब जब इसकी सारी तैयारियां हो चुकी हैं तो देरी क्यों?”

”गुजरात में इलेक्शन से पहले राहुल मंदिर-मंदिर जाकर अपनी श्रद्धा दिखा रहे हैं। दूसरी ओर, सिब्बल के जरिए सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि केस की सुनवाई ठालना चाहते हैं। राहुल गांधी इस पर अपनी रुख साफ करें। मैं चाहता हूं कि जल्दी केस का फैसला आए और अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनना चाहिए।”

उधर, कांग्रेस ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। पार्टी स्पोक्सपर्सन रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ”कांग्रेस का रुख हमेशा से साफ रहा है कि अयोध्या विवाद का फैसला सुप्रीम कोर्ट में होना चाहिए। जैसा कानून मंत्री कई बार कह चुके हैं। बीजेपी ‘मंथरा’ (राम को वनवास भेजने के लिए कैकेयी को उकसाने वाली महिला) की भूमिका निभा रही है। कपिल सिब्बल केस के वकील हैं तो ये उनका निसी मामला है। कांग्रेस पार्टी का इससे कोई लेनादेना नहीं है। भोपाल गैसकांड केस में अरुण जेटली भी आरोपी के वकील थे। इसका मतलब कि पूरी बीजेपी को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दें?

राहुल गांधी गुजरात के इन मंदिरों में गए
द्वारकाधीश, कागवड में खोडलधाम, नाडियाड के संतराम मंदिर, पावागढ़ महाकाली, नवसारी में ऊनाई मां के मंदिर, अक्षरधाम मंदिर, बहुचराजी के मंदिर, कबीर मंदिर, चोटिला देवी मंदिर, दासी जीवन मंदिर, राजकोट के जलाराम मंदिर, वलसाड के कृष्ण मंदिर। इसके अलावा वह कांग्रेस की नवसजृन यात्रा के दौरान 8 और छोटे-बड़े मंदिरों में दर्शन के लिए पहुंचे।

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