अयोध्या विवाद: चुनावी दलील पर घिरे सिब्बल, सुन्नी बोर्ड ने ही उठाया सवाल

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मसले की सुनवाई को अगले लोकसभा चुनाव तक टालने की दलील देने के बाद सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल चौतरफा घिरते दिख रहे हैं। पीएम मोदी और बीजेपी के हमले के बाद अब उस सुन्नी वक्फ बोर्ड ने ही सिब्बल से किनारा कर लिया है, जिसका पक्ष रखते हुए उन्होंने शीर्ष अदालत में यह दलील दी थी।




सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य और बाबरी मस्जिद के पक्षकार हाजी महबूब ने सिब्बल के बयान को गलत करार देते हुए कहा, ‘हां, कपिल सिब्बल हमारे वकील हैं, लेकिन वह एक राजनीतिक दल से भी जुड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट में दिया गया उनका बयान गलत है। हम इस मसले का जल्द से जल्द समाधान चाहते हैं।’

हाजी महबूब ने कहा, ‘मैं तो चाहता हूं कि यह मसला जल्द से जल्द हल हो जाए। सिब्बल ने किस अंदाज से कह दिया कि 2019 के बाद सुनवाई हो? यह मैं गलत समझता हूं। 25 साल गुजर गए, मैं नहीं चाहता हूं कि 1992 की तस्वीर फिर दोहराई जाए। वह कांग्रेस के नेता भी हैं, हमें पता नहीं था कि वह ऐसी बात कहेंगे।’




बता दें कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने कहा था कि इस मसले की सुनवाई को 2019 के आम चुनाव तक टाल देना चाहिए। बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि एक वकील होने के नाते कपिल सिब्बल दलीलें पेश कर सकते हैं लेकिन उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि वह पूर्व कानून मंत्री रह चुके हैं। इस बात से उनका क्या मतलब है कि वह इस मसले को 2019 तक टालना चाहते हैं। इसका बाहर क्या असर होगा? यह कई मायनो में गैरजिम्मेदाराना और गलत है।

उनके इस बयान पर हमला बोलते हुए गुजरात की एक रैली में पीएम मोदी ने कहा कि आखिर 2019 में चुनाव कांग्रेस लड़ेगी या फिर सुन्नी वक्फ बोर्ड चुनाव लड़ेगा। नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘ मुझे इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि कपिल सिब्बल मुस्लिम समुदाय की तरफ से लड़ रहे हैं पर वह यह कैसे कह सकते हैं कि अगले चुनाव तक अयोध्या मामले का कोई हल नहीं होना चाहिए? इसका संबंध लोकसभा चुनाव से कैसे है?’

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