बिहार में नए कांग्रेस अध्यक्ष का जल्द हो सकता है एलान

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बिहार कांग्रेस में फूट की आशंकाओं के बीच कांग्रेस ने प्रदेश अध्यक्ष बदलने का फैसला कर लिया है। पार्टी जल्द नए अध्यक्ष के नाम का एलान कर देगी। इस बीच, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली बुलाकर विधायकों व विधानपार्षदों से मुलाकात कर पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश की है।

विधायकों और विधानपार्षदों  के साथ अलग-अलग मुलाकात के बाद पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रदेश अध्यक्ष बदलना तय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी की जिम्मेदारी पार्टी के फैसले को अमलीजामा पहनाना है। वह यह तय नहीं कर सकते कि पार्टी को किसके साथ गठबंधन करना चाहिए या किस पार्टी के साथ नहीं करना चाहिए।

राहुल गांधी की पार्टी विधायकों के साथ बेहद सख्त लहजे में ‘क्लास’ लेने के बावजूद पार्टी रणनीतिकार मानते हैं कि कुछ विधायक टूट सकते हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा कि जो विधायक राजद के साथ गठबंधन का विरोध कर रहे हैं, वह अब या भविष्य में कभी पार्टी छोड़ सकते हैं। बिहार में अगले साल राज्यसभा चुनाव के वक्त भी यह हो सकता है। राजद का विरोध करने वाले विधायकों की संख्या करीब आठ से दस है।

मिली जानकारी के मुताबिक बिहार के अधिकतर विधायकों ने प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी की खुलकर शिकायत की है। पार्टी के एक नेता ने कहा कि कई विधायकों ने पार्टी उपाध्यक्ष से कहा कि प्रदेश अध्यक्ष ने पार्टी बदलने के बारे में उनसे भी बात की थी। मुलाकात के दौरान नए प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बारे में भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि पार्टी किसी सामान्य वर्ग के नेता को अध्यक्ष बना सकती है।

पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी से गुरुवार को नौ विधायकों और दो एमएलसी ने मुलाकात की। मुलाकात करने वालों में विधायक दल के नेता सदानंद सिंह भी शामिल थे। बैठक में शामिल होने के लिए प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी को भी बुलाया गया था, पर वह नहीं आए। पार्टी के एक नेता ने बताया कि अशोक चौधरी की पत्नी और बेटी बीमार है। इसलिए, वह नहीं जा सके।

गुरुवार को अशोक चौधरी ने मीडिया के सामने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पार्टी में भीतरघात का खेल चल रहा है और इसमें शीर्ष नेताओं की ही मुख्य भूमिका है। यह कहते हुए अशोक चौधरी इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखें भर आईं।

चौधरी ने कहा कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी के बड़े नेता ही इस सारे खेल को खेल रहे हैं। कुछ बड़े नेता अपने चहेतों को बिहार में पार्टी का अध्यक्ष बनाना चाहते हैं और इसकी कवायद बहुत दिनों से चल रही थी।  पार्टी को मेरी वफादारी पर कोई शंका नहीं है, लेकिन दिल्ली में बैठे कुछ सीनियर नेता ही नहीं चाहते कि मैं इस पद पर रहूं। चौधरी ने बिहार में पार्टी की संभावित टूट की आशंका से भी इनकार किया।

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