‘साकारात्मक सोचना और करना ही पुण्य’ पंजाब के जालंधर में बोले ईशपुत्र ‘महायोगी सत्येंद्र नाथ’

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जालंधर : 
जब पंजाब के जालंधर में पहली बार ‘कौलान्तक पीठ’ के ‘पीठाधीश्वर’ ‘महायोगी सत्येंद्र नाथ’ पहुंचे, तो उनका और माँ प्रिया भैरवी का भव्य स्वागत हुआ। महायोगी जिनको ‘ईशपुत्र’ के नाम से जाना जाता है को लीक से हट कर चलने वाला योगी माना जाता है। ‘ईशपुत्र’ को जहाँ ‘टीवी मीडिया’ के माध्यम से लोग जानने लगे हैं वहीँ ‘इंटरनेट’ और ‘सोशल मीडिया’ के द्वारा भी उनसे जुड़ने वालों की तादाद में भारी वृद्धि हुई है। ईशपुत्र के साथ माँ प्रिया भैरवी भी उपस्थित रहीं। पंजाब के जालंधर में इस कार्यक्रम को जालंधर की ही भैरवी मोनिका गाँधी और उनके पति भैरव मनोज गाँधी ने आयोजित किया। ‘प्रिया-ईशपुत्र’ इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए ‘न्यू प्रेम नगर’ पहुंचे तो ढोल-नगाड़ों और पुष्प वर्षा से उनका स्वागत सत्कार हुआ। सड़क के दोनों ओर लोगों की कतारों ने फूलों द्वारा स्वागत किया और आशीर्वाद लिया।

इसके बाद ‘प्रिया-ईशपुत्र’ ने ‘श्री देवी तालाब मंदिर’ जा कर ‘देवी’ के दर्शन किये। आगे-आगे ‘प्रिया-ईशपुत्र’ और पीछे-पीछे उनके चाहने वालों का जमावड़ा था। उनहोंने तालाब और मंदिर परिसर के आध्यात्मिक सौंदर्य का लाभ लिया। यहाँ भी ढोल नगाड़े और छत्र के साथ ‘प्रिया-ईशपुत्र’ को देखने की लोगों में होड़ लगी रही। दर्शन पूजा के बाद इसी मंदिर परिसर में बने ‘सालासर धाम’ में ‘हनुमान दर्शन’ किये और मंच पर आसीन हुए।

मधुर कीर्तन और भजन के बाद ‘ईशपुत्र’ ने उपस्थित लोगों को अपने ‘विचार-सत्संग’ से अभिभूत किया। ‘ईशपुत्र’ ने ‘जीवन दर्शन’ से बात प्रारम्भ की और ‘समय’ के प्रवाह में ‘हमारी’ स्थिति पर विषय को केंद्रित करते हुए, मनुष्य के दुखों के कारणों पर ध्यान दिलाया। उनहोंने मनुष्य के लिए ‘ज्ञान’ और ‘सत्य’ को महत्वपूर्ण बताया और ‘धर्म सार’ से इस विषय को जोड़ा। आज की दुनिया में ‘धर्म’ और ‘अध्यात्म’ की क्या जरूरत और उपयोगिता है ये विस्तार से समझाते हुए उनहोंने ऋषियों के द्वारा बताये मार्ग को श्रेष्ठ बताया। आधुनिक विज्ञान के कारण अध्यात्म को समझना और भी आसान हो गया है। ‘ईशपुत्र’ ने अध्यात्म को गहनता से समझने पर बल दिया। युवाओं को अध्यात्म और धर्म तर्कसंगत चाहिए इसलिए सही गुरु के महत्त्व पर प्रकाश डाला। अध्यात्म आपको हर स्तर पर सफलता देता ही है ऐसा समझाते हुए ‘ईशपुत्र’ ने सबको श्रेष्ठ और उत्तम बनने को कहा।

भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक आयोजन को आरती और प्रसाद वितरण के बाद विश्राम दिया गया। ये कार्यक्रम 7 मई रविवार को भी दिन भर चलेगा। जिसकी शुरुआत सुबह 7 बजे से होगी। साधक और भैरव-भैरवियां दीक्षा प्राप्त कर साधना जगत में प्रवेश करेंगे।

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