नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश निलंबित

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नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की के खिलाफ रविवार को दो बड़े सत्तारूढ़ दल संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाए जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। उन पर कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में ‘हस्तक्षेप’ करने और ‘पूर्वाग्रही’ फैसले देने के आरोप हैं। महाभियोग प्रस्ताव पर असंतोष जताते हुए उप प्रधानमंत्री और गृह मामलों के मंत्री बिमलेंद्र निधि ने इस्तीफा दे दिया। निधि के निकट सहयोगी ने बाकी पेज 8 पर संवाददाताओं से कहा कि इस पहल पर उन्हें घोर आपत्ति है। निधि कैबिनेट में नेपाली कांग्रेस के नेता हैं जो वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी है। कार्की (64) ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में परास्नातक किया है।

नेपाली कांग्रेस (नेकां) के सांसद मीन बिश्वकर्मा और सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के मुख्य सचेतक टेक बहादुर बासनेट ने अन्य सांसदों के साथ मिलकर आज दोपहर संसद सचिवालय में प्रस्ताव दर्ज कराया। महाभियोग प्रस्ताव पर सत्तारूढ़ नेकां और सीपीएन (माओइस्ट सेंटर) के 249 सांसदों ने हस्ताक्षर किए है जिनका कार्की पर आरोप है कि वह ‘कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करती हैं और पूर्वाग्रह से फैसले लेती हैं।’सांविधानिक प्रावधानों के मुताबिक कुल सांसदों के एक चौथाई के समर्थन से संसद सचिवालय में प्रस्ताव दर्ज कराया जा सकता है। उप प्रधानमंत्री और स्थानीय विकास मंत्री कमल थापा ने महाभियोग प्रस्ताव पर नाखुशी जताई। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष ने ट्विटर पर पोस्ट में कहा कि नेकां और माओवादी सांसदों द्वारा लाया गया महाभियोग प्रस्ताव आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। कार्की पिछले वर्ष एक अगस्त को नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश बनी थीं। इस बीच गोपाल पाराजुली को कार्यवाहक प्रधान न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

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