विधायक जयराम ठाकुर, महायोगी सत्येंद्र नाथ और महायोगी अक्षर थाची में एक मंच पर एक साथ

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मण्डी: थाची में ‘एकल विद्यालय’ संच ‘बालीचौकी’ ‘आँचल कुल्लू’ का वार्षिक कार्यक्रम बेहद धूमधाम से संपन्न हुआ। जिसमें हिमालय की विश्व प्रसिद्द पीठ ‘कौलान्तक पीठ’ के पीठाधीश्वर ‘महायोगी सत्येंद्र नाथ’ और ‘माँ प्रिया भैरवी’ मुख्यातिथि के रूप में उपस्थित हुए। इस कार्यक्रम के दौरान ‘चच्योट विधान सभा’ क्षेत्र के विधायक ‘जयराम ठाकुर”विशिष्ट अतिथि’ के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में कथा व्यास ‘पुरुषोत्तम शास्त्री’ और वर्ल्ड योगा ऑर्गेनाइज़ेशन’ के ‘प्रमुख’ व प्रसिद्द आध्यात्मिक गुरु ‘महायोगी अक्षर’ ने भी उपस्थित हो कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई और धीरे-धीरे रंगारंग कार्यक्रमों ने समां बांधा।

 

 

‘महायोगी अक्षर’ ने हिमाचल आ कर अपनी जन्म भूमि को प्रणाम किया और अपने अनुभव बांटे। ‘महायोगी अक्षर’ ने नारी शक्ति के महत्त्व को प्रकाशित किया। उन्होंने हिमालय के रहस्यों, हिमालय के योगियों और हिमालय के बारे में बताते हुए अपने शब्दों से उपस्थित जन-समूह को मंत्रमुग्ध किया। ज्ञात हो कि ‘महायोगी अक्षर’ भी हिमाचल के ही स्थायी निवासी हैं। लेकिन विश्व के कई देशों में ‘योग और अध्यात्म’ का ज्ञान प्रदान कर रहें हैं। ‘महायोगी अक्षर’ को ‘कौलान्तक पीठ’ से ‘धर्माधिकार’ प्रदान किया गया है और वो ‘महायोगी सत्येंद्र नाथ’ जिन्हें विश्व ‘ईशपुत्र’ के नाम से जानता है के शिष्य है। ‘महायोगी अक्षर’ ने ‘बर्ल्ड योगा ऑर्गेनाइजेशन’ की तरफ़ से क्षेत्र के बच्चों को 11 हज़ार प्रतिवर्ष देने का आश्वासन दिया। जिससे बच्चों का उत्साह वर्धन होगा।

कार्यक्रम में कथा व्यास ‘पुरुषोत्तम शास्त्री’ ने अपनी मधुर वाणी और गीतों व शास्त्रों के श्लोकों को जोड़ते हुए मनमोहक अंदाज में अपने विचार सांझा किये। उनहोंने कहा कि पहाड़ों में महिलाएं ‘लोक गीतों’ के माध्यम से ‘शास्त्र ज्ञान’ सीखती व सिखाती हैं। उनहोंने शास्त्रीय परम्पराओं का सरलीकरण कर धर्म का महत्त्व प्रकट किया। उनहोंने ‘महायोगी सत्येंद्र नाथ’ जी और विधायक ‘जयराम ठाकुर’ की भी मंच से प्रशंसा की।

 

 

‘विशिष्ट अतिथि’ के रूप में उपस्थित विधायक ‘जयराम ठाकुर’ ने ‘बेटी बचाओ’ की अपील सुन्दर तरीके से की। उन्होंने सामाजिक बुराइयों के साथ-साथ देवपरम्परा में कुछ सुधार करने की बात कही। धूम्रपान और नशे के सेवन से देव परम्परा को मुक्त करने की अपील भी की। उनहोंने बच्चों में संस्कारों और शिक्षा की गुणवत्ता की बात करते हुए कार्यक्रम की सराहना की। उनहोंने कहा कि लोग ‘नेताओं की बातों पर ध्यान नहीं देते। नेता लोगों से अपील करते रहते हैं और लोग उसे खानापूर्ति समझते हैं। इस सोच से बाहर आ कर, हम जो अपील करते हैं उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।’ विधायक ‘जयराम ठाकुर’ ने ‘ऐच्छिक निधि’ से 21 हज़ार की घोषणा भी की। इस कार्यक्रम के दौरान विधायक क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को भी लगातार सुन रहे थे।

 

 

कार्यक्रम के अंत में इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ‘कौलान्तक पीठाधीश्वर महायोगी सत्येंद्र नाथ’ ने आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए धर्म और हिन्दुओं की दुर्दशा के कारणों पर अपने सुविचार रखे। उनहोंने जातिवाद और ऊंच-नीच की दुर्भावना पर कड़ा प्रहार करते हुए, ऐसी संकुचित मानसिकता से बाहर आने की बात कही। उनहोंने मीडिया के गिरते स्तर और पीत पत्रकारिता को आड़े हाथों लेते हुए स्वच्छ और गरिमामय पत्रकारिता की जरूरत पर बल दिया। उनहोंने परम्पराओं को समझने और उनकी वैज्ञानिकता को समझने पर भी बल दिया। युवाओं को सम्बोधित करते हुए ‘ईशपुत्र’ ने कहा कि ‘ज्ञान’ को विभिन्न तरीकों से अर्जित करने की आवश्यकता है। ज्ञान ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाता है। ‘ईशपुत्र’ ने शुद्ध जल, शुद्ध भोजन और शुद्ध वातावरण के महत्त्व को भी स्पष्ट किया। उनहोंने देश के पिछड़ने के कारणों को गिनाते हुए उसके कुछ उपाय सुझाये जो हम कर सकते हैं। ‘ईशपुत्र’ ने छोटे-छोटे बच्चों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी प्रशंसा की। ‘कौलान्तक पीठ’ की संचित निधि’ से ‘ईशपुत्र’ ने इस कार्यक्रम के लिए 25 हजार की धनराशि प्रदान की।

 

 

संच अध्यक्ष धनी राम ने कार्यक्रम की सफलता के लिए अतिथियों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। संच प्रभारी संजीव शर्मा ने भी सभी की उपस्थिति व सहयोग के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए भविष्य में भी सहयोग की प्रार्थना की। इस अवसर पर संच सचिव गोपी चंद वर्मा भी उपस्थित थे ।

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