सीरिया अटैक: इंसानियत शर्मसार, इस तस्वीर ने हर किसी को झकझोर दिया

0 207

 सीरिया पिछले करीब 6 साल से गृहयुद्ध की आग में जल रहा है। मंगलवार का दिन भी कोई अलग नहीं था। सालों से चले आ रहे गृहयुद्ध के बीच भी यहां जिंदगी चल रही थी। जिंदगी यहां बहुत ज्यादा खुशनुमा तो नहीं थी, लेकिन अपनों के बिछड़ने का जो दर्द मंगलवार दे गया, वैसा मंजर शायद ही इस देश ने पहले कभी देखा हो। आज मौत ने इस युद्धग्रस्त देश के इडलिब प्रांत स्थित खान शेखून शहर में तांडव मचाने की ठान रखी थी।

…और शर्मसार हो गई मानवता

सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना ने मंगलवार को विद्रोही गुट के कब्जे वाले खान शेखून शहर पर केमिकल हमला कर दिया। जैसे ही यह गैस शहर में फैली, हर ओर चीख पुकार मच गई। सांसें उखड़ने लगी और देखते ही देखते लाशों का ढेर लग गया। मानवता को शर्मसार करने वाले हमले में सबसे ज्यादा प्रभावित मासूम बच्चे और महिलाएं हुईं। जिसने भी इस हमले की खबर सुनी वह सन्न रह गया। केमिकल हमला कितना भयावह होता है, शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो नहीं जानता होगा। जो नहीं जानता था उसे भी इस हमले ने समझा दिया होगा।

यह तो दर्द का दरिया है

इस केमिकल हमले ने 30 बच्चों और 20 महिलाओं सहित 100 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। 400 से ज्यादा लोग घायल हैं और मृतकों की संख्या में अभी और इजाफा हो सकता है। भारत में कहा जाता है कि किसी पिता के लिए सबसे बड़ा दर्द अपने ही बेटे के शव को कांधा देना होता है। लेकिन इस हमले ने तो मासूमों को मौत की नींद सुला दिया और ताबूत जितना छोटा होता है, दर्द भी उतना ही ज्यादा होता है। इस लिहाज से यह हमला अमानवीय तो था ही, साथ इसने दिलों में दर्द का जो दरिया दिया है वह कब शांत होगा कोई नहीं जानता।

इनका क्या दोष था

इस भीषण केमिकल हमले में जान गंवाने वाले 9 माह के दो जुड़वां बच्चे अया और अहमद भी थे। अपने दो-दो मासूमों के शव देखकर उस पिता पर क्या गुजरी होगी, इसे तो कोई महसूस भी नहीं कर सकता। फिर भी पिता अब्देल हमीद अलयूसेफ ने दोनों मासूमों को गोद में उठाया। दोनों के शव अपनी छाती के अगल-बगल लगाकर वह बिलख पड़ा। उसके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे और होंठ जिस तरह से कांप रहे थे वह बेपनाह दर्द को बयान कर रहे थे। अलयूसेफ की यह तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो रही है और हर कोई उनके दर्द को समझने की कोशिश कर रहा है। लेकिन शायद ही कोई अलयूसेफ के दर्द को समझ सके। हर किसी दिल से एक ही प्रश्न उठ रहा है, आखिर इन मासूमों का क्या दोष था? इस प्रश्न का जवाब तो शायद राष्ट्रपति बशर अल-असद भी नहीं दे पाएं।

परिवार के 22 लोग एक ही कब्र में दफन

अब्देल हमीद अलयूसेफ का हंसता-खेलता परिवार एक झटके में खत्म हो गया, उसके दर्द की थाह शायद ही आप और हम ले सकें। क्योंकि इन दो जुड़वा मासूमों के अलावा उनके परिवार के 20 और लोग इस केमिकल हमले में मारे गए। जुड़वा मासूमों सहित सभी 22 लोगों को एक ही बड़ी सी कब्र में एक साथ दफनाया गया। अपने जिगर के टुकड़ों को इस तरह अपनी छाती से दूर करने पर पिता जैसे टूट गया। उसके लिए तो जैसे पूरी दुनिया ही उजड़ गई, एक साथ परिवार के 22 लोगों को दफन करके अब वह समझ नहीं पा रहा है कि जिंदगी के इस अंधेरे से दूर कैसे जाए।

केमिकल हमले की हो रही आलोचना

दुनियाभर की मीडिया ने केमिकल हमले की इस खबर और अब्देल हमीद अलयूसेफ की अपने मासूम बच्चों के शवों को गोद में उठाए हुए बिलखने की तस्वीर को प्रमुखता से छापा है। दुनियाभर में इस हमले की कड़ी आलोचना हो रही है। पारंपरिक मीडिया के अलावा सोशल मीडिया पर भी इस हमले की कड़ी निंदा की जा रही है। केमिकल हमले के बाद बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक में सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद का समर्थन कर रहे रूस को कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। तमाम देश रूस की जमकर निंदा कर रहे हैं, लेकिन रूस सीरियाई सुरक्षा बलों का समर्थन जारी रखने पर अड़ा हुआ है।

फिर आमने-सामने आए रूस और अमेरिका

केमिकल हमले को लेकर रूस और अमेरिका एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ रूस ने सीरिया का समर्थन करते हुए केमिकल हमले के लिए विद्रोही गुटों को जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी तरफ अमेरिका इसके लिए सीरियाई राष्ट्रपति को जिम्मेदार ठहरा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस दर्दनाक हमले ने उनका नजरिया ही बदलकर रख दिया है। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अगर संयुक्त राष्ट्र सीरिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो अमेरिका अकेले ही ऐसी कार्रवाई करेगा।

You might also like More from author

Leave A Reply

Your email address will not be published.

Bitnami