आधार-पैन लिंकिंग में समस्‍या, नाम के शुरुआती अक्षर ही बन रहे परेशानी का सबब

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चेन्‍नई (जेएनएन)। सरकार ने आधार कार्ड और पैन कार्ड लिंक करने का आदेश जारी कर दिया है, लेकिन इस लिंकिंग में व्‍यक्‍ति का नाम ही बाधा उत्‍पन्‍न कर रहा है, क्‍योंकि आधार के डाटाबेस में स्‍पेशल कैरेक्‍टर की पहचान नहीं होती, जबकि पैन के डाटाबेस को इसकी पहचान है। इस समस्‍या के समाधान के लिए सीए व अन्‍य विशेषज्ञों का मानना है कि आधार के डाटाबेस में बदलाव कर दिया जाए।

बेंगलुरु के बैंकर के. वेंकटेश को ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ा। टैक्‍स रिटर्न फाइल करते वक्‍त उनका पैन और आधार कार्ड एक दूसरे से मैच नहीं हो पाया। उन्‍होंने अकाउंटेंट से संपर्क किया तब जाकर उनकी परेशानी के कारण का पता चला। देश के लाखों लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए पैन को आधार कार्ड से जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है और इसकी अंतिम तारीख 31 जुलाई तक है।

कॉलेज लेक्‍चरर यूगीन डी सिल्‍वा (Eugiene D’Silva) की मदद चार्टर्ड अकाउंटेंट नहीं कर सकते, क्‍योंकि आधार डाटाबेस में स्‍पेशल कैरेक्‍टर जैसे एपोस्‍ट्रॉफी के लिए जगह नहीं, जबकि पैन कार्ड में ऐसा है। वहां स्‍पेशल कैरेक्‍टर की पहचान होती है। इसी तरह का मामला के एस श्रीनिवास का है जिनके पैन कार्ड विवरण में उनके शुरुआती अक्षरों के बीच में फुल स्‍टॉप है, जबकि आधार में नहीं।

श्रीनिवास ने बताया, ‘पैन कार्ड पर नामों को बदलना हमारे लिए असंभव है क्‍योंकि इसके लिए हमें कई और कागजातों में बदलाव करना होगा, बैंकों को सूचित करना होगा।’ चार्टर्ड अकाउंटेंट व वकीलों का कहना है कि सरकार को लिंकेज के लिए मैनुअल प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए और छोटी समस्याओं के लिए यूआईडीएआई को आधार-पैन डेटाबेस को लिंक करवाना चाहिए।

बेंगलुरु के सीए पंकज धर्माशी ने बताया, सरकार को विशेष सेल बनाना चाहिए। हमारे अधिकतर क्‍लाइंट के पास 15-25 सालों से पैन कार्ड है। अब नया पैन कार्ड लेना और सभी कागजातों को अपडेट कराना असंभव है। इसलिए बेहतर है कि आधार डाटाबेस में ही विवरण को सुधार दिया जाए।

आधार और पैन के डाटाबेस में ये अंतर

– आधार स्पेशल कैरेक्टर्स को नहीं पहचानता है, जबकि पैन पहचान लेता है।

– नाम के शुरुआती अक्षर को आधार नहीं पहचान पाता, जबकि पैन इसे भी पहचान लेता है।

– स्पेशल कैरेक्टर्स वाले उपनामों, मसलन D’Souza या डॉट्स वाले उपनामों की वजह से लिंकिंग में परेशानी आती है।

– विशेषकर दक्षिण भारतीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है क्‍योंकि वे अपने नाम के पहले गांव का नाम और पिता का नाम लगाते हैं।

– विवाह के बाद या किसी अन्‍य कारण से नाम में बदलाव करने पर समस्‍या।

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