कौलांतक पीठ में संपन्न हुआ ऐतिहासिक कुमारी साधना शिविर

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कुल्लू (विकास पाण्डेय) :

कौलांतक पीठ हिमालय के बालीचौकी आश्रम में 25 मार्च से 26 मार्च तक ऐतिहासिक ‘कुमारी साधना शिविर’, कौलांतक पीठ के पीठाधीश्वर महायोगी सत्येंद्र नाथ (ईशपुत्र) के सानिध्य में पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। देश- विदेश से आए कई साधक – साधिकाओं (भैरव – भैरवियों) ने इस साधना शिविर में हिस्सा लिया। ईशपुत्र ने बताया कि कुमारी साधना तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण व गोपनीय साधना है। प्राचीन समय में यह साधना बड़े-बड़े सम्राट व ‘ऋषि- मुनि’ जीवन में ऐश्वर्य व राज्य सत्ता प्राप्त करने हेतु इस साधना को किया करते थे। ईशपुत्र ने बताया कि कुमारी साधना को राजा महाराजा एवं उच्च कोटि के ऋषि ही संपन्न किया करते थे। सामान्य व्यक्ति या सामान्य साधक भगवती के ‘कन्या पूजन’ किया करते थे। ईशपुत्र ने बताया कि कुमारी साधना को साधक अगर अच्छे से पूरा करें तो साधक के जीवन में हमेशा शुभ व मंगल ही होता है।
कौलांतक पीठ में कुमारी साधना के लिए ‘कुमारी’ यानी की छोटी कन्या का चयन बहुत ही जटिलता के साथ किया गया। ईशपुत्र ने बताया कि कुमारी का चयन ‘सामुद्रिक शास्त्र’ इत्यादि ‘पौराणिक ग्रंथों’ को मापदंडों में रखते हुए कन्या (लड़की) के समस्त गुणों को पूरी तरह से जांच पर कर किया जाता है। ईशपुत्र ने बताया कि कुमारी के लिए कई कन्याओं के नाम के प्रस्ताव आये, लेकिन सभी गुणों को जांच परख कर अंततः नेपाल की कुमारी ‘दृष्टि कोइराला’ (6 वर्ष) का चयन हुआ। ईशपुत्र ने बताया की दृष्टि में कुमारी देवी के वह समस्त गुण मौजूद थे, जिस वजह से उनको कुमारी देवी के रूप में चयन किया गया। इस कौलांतक पीठ की परंपरा के अनुसार मां भगवती की ‘प्रतीकात्मक पूजा’ के रूप में कुमारी पूजन किया जाता है। कुमारी साधना की शुरुआत से पहले सभी भैरव भैरवियों को 90 मिनट का विशेष प्राणायाम व योग अभ्यास करवाया गया। उसके बाद लगभग 90 मिनट तक चले विशेष कौलाचार प्रार्थना -’ईशपुत्र विधानम’ के बाद ‘कुमारी साधना’ की शुरुआत की गई।साधना विशेष पूजा, हवन आदि क्रियाओं द्वारा संपन्न हुई। साधना के दौरान विशेष मंत्रों का उच्चारण (भजन) भी किया गया।

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न्यूज़ लाइव नॉऊ की टीम ने मौके पर जाकर देश- विदेश से आए कई भैरव- भैरवियों से कुमारी साधना के बारे में उनकी राय ली। मुंबई से आए कुमार देवव्रत आलोक ने बताया कि कुमारी साधना शिविर मेरे जीवन का सबसे अनमोल समय था। उन्होंने कहा कि यहां शिविर में आकर सब को एक ही तरह की विशेष वेषभूषा -‘कौलाचार’ में रहकर साधना करना बहुत अच्छा लगा। आलोक ने बताया कि ईशपुत्र के साथ साधना में 2 दिन कैसे गुजर गए पता ही नहीं चला। ऐसा लगा मानो कि 2 घंटा भी ना गुजारा हो।लखनऊ से आये AGS इंडस्ट्री के डायरेक्टर कुशकांत ने बताया कि इस साधना शिविर में शामिल होना उनके जीवन के लिए गौरव की बात है।प्रिया -ईशपुत्र के प्रेम व आशीर्वाद से इस शिविर में उन्हें आने का सौभाग्य मिला। ‘कुमारी देवी’ के याद में भाव विभोर होते हुए कुशकांत जी ने बताया कि वह पिछले 3 साल से कौलांतक पीठ की साधना में हिस्सा लेते आ रहे हैं और वह आज जिस मुकाम में है वह ‘कुमारी देवी’ व प्रिया- ईशपुत्र के प्यार व आशीर्वाद से यहां पहुंचे हैं।

इस अवसर पर माँ प्रिया भैरवी ने कहा कि यह साधना बहुत ही दुर्लभ साधना है। जो भाग्यवान एवं कर्मशील साधक हैं, जिन पर ‘सूक्ष्म हिमालय’ के रहने वाले ‘गुरुमंडल’ की अनुपम कृपा है और जो माँ भगवती के सच्चे उपासक हैं उन्हें यह साधना करने का अवसर मिला है। प्रिया माँ ने कहा कि यह साधना करने वाले हर भैरव- भैरवियों के जीवन में सुख संपन्नता आए ऐसी हमारी भगवती से प्रार्थना है।

kumari 3इस मौके पर कौलांतक पीठ के पीठाधीश्वर -ईशपुत्र ने कहा कि तमाम विचार आपको नीचे गिराते हैं, केबल प्रार्थना ही आपको ऊपर उठाती है। ईशपुत्र ने कहा कि ‘कुंवारी साधना’ आपको ‘आत्म रति’ यानी कि खुद से प्यार करना सिखाती है। ईशपुत्र ने कहा कि किसी भी साधना को करने के लिए अपने आप से प्यार करना बहुत जरूरी है। जो खुद से प्यार नहीं करता वह कोई भी साधना सिद्ध नहीं कर सकता। ईशपुत्र ने कहा कि ‘प्रार्थना’ व ‘धार्मिक पुस्तकें‘ साधक के लिए ‘ट्रिगर’ का काम करती है। जीवन में जब किसी व्यक्ति को किसी बात या किसी घटना से ‘ट्रिगर’ मिलता है तो उस व्यक्ति के जीवन में चमत्कारिक रूप से बदलाव आते हैं।
’कुमारी साधना’ शिविर का समापन ‘गंधर्व कलामंच’ में विशेष गीत- संगीत व कुल्लू के लोकप्रिय फोक सिंगर जीवन ठाकुर व लीला ठाकुर ने अपने मधुर गान से किया।लीला ठाकुर के गानों में सभी भैरव भैरवी थिरकने पर मजबूर हो गए । साथ ही सभी भैरव- भैरवियों ने कुल्लू के लोकप्रिय नृत्य ‘नाटी’ में झूमते हुये लीला की मनमोहक प्रस्तुति का आनंद उठाया।

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