चीनी सेना ने किया अत्याधुनिक DF-16 मीडियम रेंड बलिस्टिक मिसाइलों के साथ अभ्यास : भारत, जापान, और अमेरिका पर हैं नजर

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phpThumb_generated_thumbnailचीन में हाल ही गठित रॉकेट फोर्स ने अत्याधुनिक DF-16 मीडियम रेंड बलिस्टिक मिसाइलों के साथ अभ्यास किया है। ये मिसाइलें करीब एक हजार किलोमीटर तक मार कर सकते हैं। भारत के साथ साथ जापान और अमेरिका भी इसकी जद में आते हैं। आमतौर पर अपने हथियारों के बेड़े और सैन्य क्षमताओं को गुप्त रखने वाली चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने हाल ही में किए गए एक सैनिक अभ्यास का एक विडियो जारी किया है। इस विडियो में इन DF-16 मीडियम रेंड बलिस्टिक को दिखाया गया है।

इस फुटेज में कई लॉन्च वीइकल्स में ये मिसाइलें लदी हुई दिखाई दे रही हैं। बता दें कि चीन ने अपने मिसाइलों और इससे जुड़े सैन्य साजो-सामान के लिए अलग से एक रॉकेट फोर्स बनाई हुई है। इस विडियो में चीनी सैनिक मिसाइल से जुड़े अभ्यास तो करते दिख रहे हैं, लेकिन वे इसे दागते हुए नजर नहीं आते। इस ड्रिल में भाग लेने वाले चीनी सैनिकों ने अलग-अलग युद्ध परिस्थितियों, मसलन-रसायनिक/बायलॉजिकल हमला, उपग्रह से जासूसी की कोशिशों का मुकाबला करने और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की स्थिति में क्या रणनीतियां अपनाई जानी चाहिए, इनका भी अभ्यास किया। इस सैन्य अभ्यास के विडियो में DF-16 के दो संस्करण दिख रहे हैं। यह तीसरा मौका था जब इन मिसाइलों का सार्वजनिक प्रदर्शन किया गया।

गंभीर चुनौती है चीन का D-16 मिसाइल
सितंबर 2015 में राजधानी पेइचिंग में आयोजित एक सैन्य परेड में पहली बार यह मिसाइल दिखा था। इसके बाद फिर जुलाई 2016 में एक टीवी न्यूज कार्यक्रम के दौरान सेंट्रल मिलिटरी कमिशन के उपाध्यक्ष को D-16 यूनिट का निरीक्षण करते हुए दिखाया गया था। इसमें यह मिसाइल भी नजर आया था। चीन की सरकार ने अपने बलिस्टिक मिसाइल्स का ब्योरा कभी सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि D-16 फर्स्ट आइलैंड चेन में तैनात अन्य राष्ट्रों की सेनाओं के लिए एक गंभीर चुनौती है। मालूम हो कि जापान से लेकर उत्तर में ताइवान और दक्षिण में फिलीपीन्स तक फैले द्वीपसमूह को चीन की सेना ‘फर्स्ट आइलैंड चेन’ के नाम से पुकारती है।

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से चीन दिखा रहा है आक्रामक तेवर

अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही चीन लगातार ताइवान को लेकर आक्रामकता दिखा रहा है। ताइवान के राष्ट्रपति के साथ ट्रंप की बातचीत के बाद से चीन लगातार यह रुख अपना रहा है। ट्रंप की इस बातचीत पर आपत्ति जताते हुए चीन ने अपने फर्स्ट एयरक्राफ्ट कैरियर को ताइवान जलडमरूमध्य भेजा था। साथ ही, चीन ने अपना एयरक्राफ्ट प्रशांत महासागर में स्थित फर्स्ट आइलैंड चेन में भी भेजा। इसके अलावा, चीन ने विवादित दक्षिणी चीन सागर क्षेत्र में भी नौसेना अभ्यास किया।

चीन ने तेज कर दी हैं अपनी सैन्य तैयारियां
सैन्य मामलों के विशेषज्ञ एक अमेरिकी चैनल ‘वॉशिंगटन फ्री बेकन’ ने 31 जनवरी को खबर चलाई कि चीन ने अपने DF-5C अंतर्महाद्वीपीय बलिस्टिक मिसाइलों को पहली उड़ान जनवरी में उड़ाया। चीन की तैयारियों को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि वह अमेरिका को अपनी क्षमताओं का संकेत देना चाहता है। मालूम हो कि ट्रंप लगातार चीन के खिलाफ आक्रामक बयान देते आए हैं। ट्रंप ने विवादित दक्षिणी चीन मसले पर भी कड़ा रुख अपनाने का संकेत दिया है। 20 जनवरी को जब ट्रंप ने राष्ट्रपति पदभार संभाला, उस दिन चीन की सेना की आधिकारिक वेबसाइट ने लिखा कि अब युद्ध की आशंकाएं ज्यादा वास्तविक लग रही हैं।

अमेरिका को निशाना बनाकर तैनात किया मिसाइल
चीन ने रूस के साथ सटी अपनी सीमा के पास एक लंबी दूरी के मिसाइल को भी तैनात किया है। रूस की मीडिया का कहना है कि इस मिसाइल का निशाना अमेरिका की ओर है। चीन की आधिकारिक मीडिया में छप रही खबरों के मुताबिक, चीन अमेरिका के साथ संभावित सैन्य संघर्ष की तैयारियां तेज कर रहा है।

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