देखें-सीएम पद को लेकर कब-कब बदले केजरीवाल के सुर

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आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने कभी रामलीला मैदान में 5 साल तक दिल्ली नहीं छोड़ने की शपथ ली थी, तो कभी पंजाब में चुनाव तक ‘खूंटा गाड़ने’ की बात कही. अब दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और AAP नेता मनीष सिसोदिया पंजाब के लोगों से कह रहे हैं कि वे ये समझकर वोट डालें कि अगले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ही बनने जा रहे हैं

गौरतलब है पंजाब आम आदमी पार्टी के तमाम बड़े नेता ये बात साफ कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री पंजाब से ही होगा और पंजाबी होगा और मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान विधानसभा चुनावों के बाद विधायकों की रजामंदी से किया जाएगा.

14 फरवरी 2015 को शपथ ग्रहण के बाद केजरीवाल ने कहा था, ‘मैं सुन रहा हूं कि हमारे नेता कह रहे हैं कि दिल्ली जीता अब देश के दूसरे राज्यों को भी जीतेंगे. ये ठीक नहीं है. इसमें अहंकार दिखता है. अहंकार मत करना, वर्ना वही हाल होगा, जो कांग्रेस का हुआ. बीजेपी का हुआ. जनता से कांग्रेस को अहंकार की वजह से ही दिल्ली से उखाड़ फेंका. अहंकार के कारण ही बीजेपी का लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में यह हश्र हुआ.’ आइए सुनें तब इस मुद्दे पर केजरीवाल के सुर.

केजरीवाल ने खुद रामलीला मैदान में यह स्वीकारा था कि भगवान ने उन्हें बनारस के लिए दिल्ली छोड़ने की सजा दी थी, तो क्या उन्होंने उससे कोई सीख नहीं ली. क्यों‍कि केजरीवाल ने खुद कहा था, ‘लोकसभा चुनाव में जो हुआ, वह भगवान ने सजा दी है. अहंकार की. मुझे भगवान ने आदेश दिया है, दिल्ली की जनता ने आदेश दिया है और अब मैं पांच साल कहीं नहीं जाऊंगा.’

बीते वर्ष सितंबर में केजरीवाल ने लुधियाना में कहा, ‘ यहीं पंजाब में खूंटा गाड़कर बैठूंगा और जब तक बादलों को जेल नहीं भेज देता, तब तक मैं पंजाब छोड़ कर नहीं जाऊंगा.

केजरीवाल पर अपनी बात से पलटने का आरोप लगता आया है. कभी कांग्रेस से गठबंधन ना करने की बात कहने वाले केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बनाने को तैयार हो जाते हैं. कभी अपने सभी चुनावी वादों को पूरा ना कर पाने की मजबूरी बयान करते हैं. हाल ही में केजरीवाल ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वे पंजाब और गोवा का चुनाव वहां की जनता के लिए लड़ रहे हैं. पंजाब और गोवा की जनता अब ईमानदार सरकार चाहती है.

 

 

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