हिमाचल प्रदेश: किन्नौर पुलिस का कारनामा! पत्रकारों के आई-कार्ड ही कर लिए ज़ब्त।

जबकि मीडिया कम्पनी को भारतीय कम्पनी एक्ट के तहत और आरएनआई से भी पंजीकरण मिला हुआ है।

(एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ) रामपुर: एक लड़की ‘हीरा भक्ति उर्फ जिया नेगी गिरिराज’ ने सुन्दर नगर के दो पत्रकारों के ख़िलाफ़ टापरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज़ करवाई। पत्रकारों के अनुसार ये शिकायत पूरी तरह से झूठी है। लेकिन इसके बाद जो पुलिस ने किया ये जान कर आप हैरान हो जाएंगे! क्योंकि पुलिस ने पत्रकारों को पूछताछ के लिए बुलाया और पत्रकार भी पुलिस को सहयोग देने के लिए पुलिस स्टेशन जा पहुंचे। यहाँ तक तो सब ठीक था। लेकिन पुलिस ने पत्रकारों को ही फ़र्ज़ी घोषित कर उनके आई-कार्ड्स ज़ब्त कर लिए। अभी गुनाह साबित भी नहीं हुआ और दोनों पत्रकारों से पुलिस ने आई-कार्ड छीन लिए। उससे भी बड़ी बात कि पुलिस ने ‘मीडिया कम्पनी’ के संपादक तक को इसकी सूचना नहीं दी। अब मामले ने तूल पकड़ लिया है दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मुंबई और हिमाचल के कई पत्रकार विरोध में आ गए हैं। सबका कहना है कि पुलिस ने ऐसा किस आधार पर किया है? अगर पुलिस ऐसी ही दादागिरी करने लगे तो पत्रकारों का काम कैसे चलेगा? क्योंकि पत्रकार तो हर दिन किसी न किसी के ख़िलाफ़ लिखेंगे और ऐसी फ़र्ज़ी शिकायतों पर आई-कार्ड ज़ब्त करने से तो पत्रकारिता ही रुक जाएगी। ऐसी हरकत करके पुलिस ने अपनी जबरदस्त किरकिरी करवा ली है। ये दाव अब पुलिस पर ही उल्टा पड़ गया है। हिमचाल प्रदेश में आये दिन पत्रकारों के साथ हो रही ऐसी घटनाओं से पत्रकारों में भारी रोष है और जयराम सरकार पत्रकारों की सुरक्षा में नाक़ामयाब रही हैं। हाल ही में बद्दी में भी एक पत्रकार पर कुछ गुंडा तत्वों द्वारा पुलिस थाने के बाहर ही हमला बोल दिया गया था। पत्रकारों को नोटिस भेजना और पुलिस की घुड़की दिखाना अब आम बात हो गया है। ज्ञात हो कि उक्त महिला ने पहले भी कई झूठी पुलिस शिकायतें दर्ज़ करवाई थीं। जो कि छानबीन में झूठी सावित हुईं। हैरानी की बात है कि बजाये उक्त महिला ‘हीरा भक्ति उर्फ जिया नेगी गिरिराज’ पर कार्यवाही करने के, पुलिस अब पत्रकारों को ही धमकाने पर आमादा है। ‘एनएलएन मीडिया-न्यूज़ लाइव नाऊ’ ने जब इस मामले में एसएचओ टापरी ‘श्याम सिंह तोमर’ से बात की तो उनका कहना था कि अगर हम आई-कार्ड ज़ब्त ना करें तो कैसे पता चलेगा कि ये लोग पत्रकार हैं? और उनका कहना था कि हमें हमारा काम करने दो और हमारे अधिकारियों से बात करो।’ पत्रकार भला कैसे फ़र्ज़ी हो सकते हैं जबकि मीडिया कम्पनी भारतीय कम्पनी एक्ट के तहत पंजीकृत है और यहाँ तक की आरएनआई से भी शीर्षक को पंजीकरण मिला हुआ है। ऐसे में पत्रकारों का रोष में आना जायज़ है। पुलिस के इस कदम के खिलाफ अब ऊँचे स्तर पर भी शिकायत दर्ज़ करवाई जायेगी।

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