उत्तर प्रदेश: आरएसएस ने अपने प्रोग्राम के जरिए शुरू किया डिजिटल प्रचार।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ):आरएसएस ने अपने प्रोग्राम के जरिए शुरू किया डिजिटल प्रचार।

(एनएलएन मीडिया – न्यूज़ लाइव नाऊ): बता  दें की उत्तर प्रदेश में RSS इस वक्त कुल 2 प्रोग्राम चला रहा है। इसमें कुल 25 मुद्दे हैं। काशी से लेकर अवध और बुंदेलखंड से लेकर मथुरा तक इसके कारसेवक घर-घर जाकर प्रचार कर रहे हैं। लेकिन किसी पार्टी या उम्मीदवार का नहीं। फिर भी उनके प्रचार से कैसे सिर्फ 1 पार्टी को फायदा होता है। आइए 5 पॉइंट में जानते हैं…हम लोगों से इन्हीं मुद्दों को ध्यान में रख कर वोट करने की अपील करते हैं। ये करते वक्त हम किसी पार्टी या उम्मीदवार का नाम नहीं लेते। बस, उनसे कहते हैं, ‘इस बार वोट राष्ट्र के नाम पर’ और वो समझ जाते हैं।दूसरा, जागरूक मतदाता मंच प्रोग्राम: वाराणसी क्षेत्र के आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया, “हम घर-घर जाते हैं। इसके पीछे का मुख्य कारण ये है कि आमतौर पर हिन्दू मतदाता देर से मतदान करते हैं, कभी-कभी भूल भी जाते हैं। हम चाहते हैं कि प्रदेश का हर एक हिन्दू वोट करने जाए और जल्द से जल्द जाए। हम मतदाताओं को वोट करने का तरीका भी सिखाते हैं।”अवध क्षेत्र के एक वरिष्ठ आरएसएस पदाधिकारी ने बताया, “2022 के चुनावों में डिजिटल प्रचार पर बहुत अधिक जोर दिया जा रहा है। इसलिए आरएसएस भी अपना डिजिटल ज्ञान दुरुस्त कर रहा है। हम उन लोगों के व्हाट्सएप नंबर इकट्ठे कर रहे हैं जिनसे हमारा मिलना-जुलना होता रहता है। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से उनसे अपने विचार साझा करते हैं। उन्हें कार्यक्रमों और वेबिनार के बारे में बताते हैं।आरएसएस पदाधिकारी ने आगे कहा, “मुख्य तौर पर हम ‘राष्ट्रवाद कारक’ मुद्दों पर फोकस कर लोगों को पक्ष में वोट करने के लिए मानते हैं। अति-स्थानीय मुद्दों पर ध्यान नहीं देते।”आगे उन्होंने सवाल किया। कहा, “मुस्लिम समुदाय वोट के मामले में ज्यादा जागरूक है तो हम हिन्दू समुदाय के लोगों को वोट के लिए जागरुक क्यों नहीं कर सकते? हम ऐसा पॉजिटिव चेंज लाने के लिए कर रहे हैं। हम अन्य समुदाय के लोगों को वोट करने से नहीं रोकते। हम केवल अपने समुदाय के लोगों को जागरुक करने पर ध्यान दे रहे हैं।

 

लखनऊ के एक आरएसएस कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हम उन विधानसभा क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जहां मुस्लिम आबादी 30% से अधिक है और हिन्दू वोट संगठित हैं। राष्ट्रवाद को नेरेटिव बनाने के लिए हम किसान संघोष्टि, महिला संघोष्टि, युवा संघोष्टि का आयोजन करते हैं। राष्ट्रीय विचार परिषद के बैनर तले बड़े-बड़े सेमिनार भी करते हैं।यूपी भाजपा के एक पदधारी व्यक्ति ने भी इंडिया टुडे को बताया, “चुनाव में आरएसएस के पदाधिकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस चुनाव में मतदान प्रतिशत का बड़ा महत्व है। आरएसएस के पदाधिकारी चुनाव के दिन भी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं जब पार्टी के समर्थकों की संख्या कम होती है।

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